कोलकाता : चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में संशोधन करते हुए नई समय-सारणी जारी की है। यह संशोधन उन बारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगा जहाँ यह प्रक्रिया वर्तमान में प्रचलित है। आयोग के अनुसार, पूर्व घोषित तिथियों में परिवर्तन प्रशासनिक आवश्यकता तथा तकनीकी कार्यों की सुगमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन हेतु एनुमरेशन फॉर्म को अपलोड करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर तय थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दिया गया है। आयोग का कहना है कि बूथ स्तर अधिकारियों को तकनीकी प्रक्रिया में अधिक समय की आवश्यकता पड़ रही थी, जिसके कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया।
नई तिथियों के अनुसार कार्यक्रम का स्वरूप
संशोधित तिथियों के अनुसार, 12 दिसंबर से 15 दिसंबर तक मसौदा मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके पश्चात 16 दिसंबर को मसौदा सूची का प्रकाशन किया जाएगा। मतदाता सूची में सुधार, आपत्तियों एवं दावों के लिए अब 15 जनवरी तक का समय उपलब्ध होगा। इस अवधि में मतदाता, राजनीतिक दल, अथवा अधिकृत प्रतिनिधि उचित साक्ष्य सहित अपने दावे दर्ज करा सकेंगे।

सुनवाई और विवादों का निपटारा
चुनाव आयोग की दिशा-निर्देशानुसार, प्राप्त दावों एवं आपत्तियों की जांच 16 दिसंबर से प्रारंभ होकर 7 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान आवश्यक होने पर संबंधित आवेदक को सुनवाई हेतु उपस्थित होने की सूचना दी जाएगी। आदेशों के पारित होने के बाद, निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ईआरओ) को सूची को अंतिम रूप देने से पूर्व 10 फरवरी तक आयोग की अनुमति प्राप्त करनी होगी।

अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 14 फरवरी को किया जाएगा, जिसके बाद आगामी चुनावों की तैयारियाँ उसी आधार पर आगे बढ़ेंगी। इस सूची के जारी होने के बाद किसी प्रकार के परिवर्तन के लिए सामान्य प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
इन राज्यों में लागू रहेगा संशोधित कार्यक्रम
मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह संशोधित समय-सारणी गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप तथा पश्चिम बंगाल में प्रभावी रहेगी। इन सभी राज्यों में 4 नवंबर से विशेष पुनरीक्षण का चरण प्रारंभ हुआ था, जिसके अंतर्गत बूथ स्तर अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर एनुमरेशन फॉर्म वितरित किए गए।

बीएलओ को मिली अतिरिक्त राहत
सूत्रों के अनुसार, अधिकांश बीएलओ को फॉर्म अपलोड करने में तकनीकी बाधाएँ और अत्यधिक कार्यभार का सामना करना पड़ रहा था। चुनाव से पूर्व बड़े पैमाने पर होने वाले मतदाता सूची प्रबंधन कार्य को देखते हुए आयोग ने यह माना कि सात दिन का विस्तार कार्य को व्यवस्थित रूप से पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।
राजनीतिक दलों ने जताई प्रतिक्रिया
कुछ राजनीतिक दलों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मतदाताओं को अधिक अवसर मिलेगा। वहीं कुछ दलों ने आयोग से बूथ स्तर पर निगरानी बढ़ाने की मांग की, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी व निष्पक्ष बनी रहे। यह समय-सीमा विस्तार उन मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जिन्होंने अपने दस्तावेज अब तक जमा नहीं कर सके हैं। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते आवश्यक संशोधन अवश्य कराएं, ताकि अंतिम सूची में उनका नाम सही स्वरूप में अंकित हो सके।














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