रानीगंज में चिकित्सक से करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा

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रानीगंज :  पश्चिम बर्दवान जिला इन दिनों साइबर अपराधों का गढ़ बनता जा रहा है। मंगलवार को एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने न केवल प्रशासन को हिलाकर रख दिया बल्कि आम जनता को भी डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। रानीगंज के रामबागान, डॉक्टर्स कॉलोनी के प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार शर्मा साइबर अपराधियों के ऐसे जाल में फँस गए कि एक महीने में उनसे 15 करोड़ 83 लाख 90 हजार रुपये की ठगी हो गई। जिले में एक ही व्यक्ति से हुई यह अब तक की सबसे बड़ी साइबर धोखाधड़ी मानी जा रही है।

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सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल एक योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया। 23 अक्टूबर 2025 को डॉ. शर्मा को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसका नाम “मोनार्क वीआईपी” बताया जाता है। इस ग्रुप में कई तरह के आकर्षक ऑफर और शेयर मार्केट से जुड़े बड़े मुनाफे के दावे किए जाते थे। ग्रुप के एडमिन व अन्य सदस्यों ने डॉक्टर को विश्वास में लेते हुए बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से कम समय में बहुत बड़ा लाभ मिलता है।

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पहले चरण में डॉक्टर को “मोनार्क” नामक कथित ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध बताया गया, जिससे डॉक्टर को यह एक विश्वसनीय प्लेटफॉर्म प्रतीत हुआ। 24 अक्टूबर से निवेश की शुरुआत करवाई गई—शुरुआत मामूली रकम से हुई, लेकिन ऐप में लगातार लाभ दिखा कर डॉक्टर को बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया गया। धीरे-धीरे रकम बढ़ती गई और डॉक्टर को यह यकीन दिलाने के लिए ऐप में उनका बैलेंस 200 करोड़ रुपये से भी अधिक दिखाया गया।

डॉ. शर्मा को जब बड़े लाभ की उम्मीद जगी और उन्होंने अपने ‘मुनाफे’ का हिस्सा निकालने की कोशिश की, तभी असली खेल शुरू हुआ। ऐप के तथाकथित कस्टमर केयर ने बताया कि राशि निकालने के लिए पहले “12.5 करोड़ रुपये कमीशन/टैक्स” जमा करना होगा। यहीं डॉक्टर को शक हुआ और उन्हें एहसास हो गया कि वे एक बड़े साइबर गिरोह के जाल में फँस चुके हैं।

इसके बाद डॉक्टर ने बिना देर किए नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शुक्रवार रात उन्होंने आसनसोल साइबर क्राइम थाना में भी विस्तृत लिखित शिकायत दी। शिकायत में पूरे घटनाक्रम, बैंक ट्रांजेक्शन, संदिग्ध मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी शामिल किए गए हैं।

आसनसोल–दुर्गापुर पुलिस आयुक्तालय के डिप्टी कमिश्नर (मुख्यालय) डॉ. अरविंद आनंद ने मंगलवार को जानकारी देते हुए कहा कि यह एडीपीसी क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी का मामला है। उन्होंने बताया कि जांच की कई टीमें गठित कर दी गई हैं और तकनीकी विश्लेषण के लिए संदिग्ध लिंक, ऐप और नंबरों को साइबर विशेषज्ञों को भेजा गया है। पुलिस का मानना है कि इस ठगी के पीछे किसी अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ हो सकता है, जो हाल के वर्षों में बंगाल, झारखंड और ओडिशा क्षेत्रों में सक्रिय पाया गया है।

दूसरी ओर, रानीगंज और आसनसोल के चिकित्सक समुदाय में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त है। स्थानीय डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं बल्कि समाज में असुरक्षा की भावना भी पैदा करती हैं। कई चिकित्सकों ने प्रशासन से साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान और कड़े कदम उठाने की मांग की है।

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इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में निवेश के नाम पर हो रही ठगी नई नहीं है, परंतु व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ऐप के माध्यम से इतने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होना चिंताजनक संकेत है। साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि अनजान ग्रुप, संदिग्ध लिंक, अजनबी ऐप और अत्यधिक मुनाफे के वादों से हमेशा सतर्क रहें। किसी भी निवेश से पहले उसके स्रोत, कंपनी और ऐप की वैधता की गहन जांच अवश्य करें।

रानीगंज का यह मामला एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पुलिस पूरी गंभीरता से मामले की जांच कर रही है और अपराधियों को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश जारी है।

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