आसनसोल/सालानपुर : गुरुवार को सालानपुर ब्लॉक में ज़मीन खरीद–फरोख्त से जुड़ा एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस दोनों को उलझन में डाल दिया है। मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है जिसकी मृत्यु वर्ष 1984 में दर्ज है, परंतु उसके नाम पर 2011 में लगभग 46 बीघा भूमि कई लोगों को बेच दी गई। दो अलग-अलग तिथियों में पंजीकृत इन बिक्री दस्तावेज़ों पर मृतक व्यक्ति के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।

जमीन की कीमत और कई बार बिक्री का रहस्य
अमझरिया मौजा, खतियान 303 तथा आरएस-एलआर प्लॉट 239 स्थित लगभग 15.28 एकड़ भूमि की वर्तमान कीमत साढ़े चार करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जा रही है। आरोप है कि इस भूमि को एक ही नाम पर बार-बार बेचा गया और हर बार पंजीयन कार्यालय में विधिवत रजिस्ट्री की गई। प्रथम रजिस्ट्री 24 मई 2011 को हुई, जिसमें झारखंड के मधुपुर के निवासी हरिबल्लव भादुड़ी द्वारा आसनसोल के दो व्यक्तियों—नदीम इकबाल और आमिर सिद्दीकी—को यह जमीन 13 लाख 80 हजार रुपये में बेची गई थी।
इसके बाद, इसी जमीन को दो हिस्सों में बाँटकर छह अन्य खरीदारों के नाम पर दर्ज रजिस्ट्री की गई। रूपनारायणपुर, जेमारी और सालानपुर क्षेत्र के ये खरीदार वर्षों बाद यह जानकर चौंक गए कि जिन जमीनों के लिए उन्होंने मोटी रकम चुकाई, वे पहले ही किसी और को बेची जा चुकी थीं। इस खुलासे ने उन्हें कानूनी जटिलताओं के भय से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और मामला वर्षों तक शांत पड़ा रहा।

2025 में नया मोड़, मृतक के वारिस का दावा
14 वर्षों तक शांत रहने वाला यह विवाद इस साल अचानक फिर उभर आया, जब हरीश शर्मा नामक व्यक्ति ने सालानपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया कि इस जमीन की वास्तविक वारिस हरिबल्लव भादुड़ी की बहू गार्गी भादुड़ी हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार गार्गी ने वर्ष 2025 में हरीश शर्मा और उनके सहयोगी अनंत आर्य को पावर ऑफ अटॉर्नी प्रदान की, जिसके आधार पर वे जमीन का किराया जमा कराने जब ब्लॉक लैंड एंड लैंड रेवेन्यू ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि जमीन तो पहले से ही कई व्यक्तियों के नाम दर्ज है।
इसके बाद 1 दिसंबर को सालानपुर थाने में केस नंबर 198/25 दर्ज किया गया। गार्गी भादुड़ी का दावा है कि उनके ससुर हरिबल्लव भादुड़ी का निधन 12 अक्टूबर 1984 को हो चुका था, इसलिए 2011 में उनके नाम पर कोई भी रजिस्ट्री पूर्णतः फर्जी है। उन्होंने इसे जमीन माफियाओं की संगठित धोखाधड़ी बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की जांच और उभरते सवाल
मामले की जांच रूपनारायणपुर चौकी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी के अनुसार यह धोखाधड़ी बेहद जटिल है और इसमें कई स्तरों पर फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल की आशंका है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि—2011 में हरिबल्लव भादुड़ी की जगह किसने दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए?जमीन के शुरुआती खरीदारों ने क्या वाकई असली मालिक से खरीदारी की थी?पावर ऑफ अटॉर्नी 14 वर्ष बाद कैसे और क्यों जारी की गई?क्या पंजीयन कार्यालय ने दस्तावेज़ों के सत्यापन में लापरवाही की?इन सवालों के जवाब मिलने तक जांच आगे बढ़ पाना कठिन माना जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों का दावा: जमीन लंबे समय से विवादित
स्थानीय भूमि विशेषज्ञों के अनुसार, हरीशडी गांव के पास यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी और वर्षों पहले इसकी कीमत नाममात्र थी। पिछले कुछ वर्षों में खनन गतिविधियों और कोलियरी विस्तार के कारण भूमि का मूल्य अचानक बढ़ गया, जिसके बाद जमीन माफियाओं की नजर इस भूखंड पर पड़ गई और धोखाधड़ी का सिलसिला शुरू हुआ।
अंत में…सालानपुर की यह घटना भूमि फर्जीवाड़े का ऐसा उदाहरण बनकर उभर रही है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही, दस्तावेज़ों की अवैध हेराफेरी और संगठित दलाली के पूरे नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और वास्तविक सच्चाई सामने आने में अभी समय लगेगा।














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