रेल कर्मियों की 48 घंटे हड़ताल समाप्त, चेतावनी संग आंदोलन विराम

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आसनसोल :  गुरुवार सुबह रेल रनिंग स्टाफ की 48 घंटे से जारी हड़ताल का शांतिपूर्ण समापन कर दिया गया, लेकिन कर्मचारियों ने साफ संकेत दे दिया कि उनकी मांगें यदि समयबद्ध रूप से पूरी नहीं हुईं, तो आगे और तीखे आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। हड़ताल समाप्त कराने की औपचारिक घोषणा पूर्व मंडल सचिव कॉमरेड बी. के. संयाल ने की।

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हड़ताल स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र
सुबह लगभग 10 बजे, आसनसोल रेल मंडल परिसर में आयोजित संक्षिप्त सभा में रनिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और महिला समिति के सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। उपस्थित कर्मचारियों ने नारे लगाकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की और चेताया कि यह आंदोलन भले ही स्थगित हो गया हो, परंतु संघर्ष की भावना अब और मजबूत हो गई है।

सभा में पूर्व मंडल सचिव अवधेश प्रसाद, महिला समिति की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला भारती, सचिव निर्मला सिंह, वर्तमान मंडल सचिव आर. के. सिंह, वरिष्ठ सदस्य बीरेन्द्र कुमार, एस. के. प्रसाद, गुड़िया सिंह समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे।

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वक्ताओं ने कहा—“मांगें लंबित रहीं तो संघर्ष और तेज़ होगा
सभा के दौरान सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उनकी मांगें रेल प्रशासन तक कई बार पहुँचाई गईं, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। कर्मचारियों ने वेतन विसंगतियों, कार्य के औसत समय में बढ़ोत्तरी, सुरक्षा मानकों के पालन और स्टाफ की भारी कमी जैसे मुद्दों को तत्काल प्रभाव से सुलझाने की मांग दोहराई।

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एक वरिष्ठ कर्मचारी ने संबोधन में कहा—
“रनिंग स्टाफ रेल विभाग की रीढ़ है। यदि हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो रेल परिचालन पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। हम संघर्ष के लिए तैयार हैं।”

उधर महिला समिति की अध्यक्ष सुशीला भारती ने कहा कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों में सुधार को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए, परंतु आज तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि उपेक्षा जारी रही तो महिला कर्मचारी भी बड़े स्तर पर आंदोलन में उतरेंगी।

हड़ताल समाप्त, पर संघर्ष जारी”—कॉमरेड बी. के. संयाल
सभा में हड़ताल समाप्त करने की घोषणा करते हुए कॉमरेड बी. के. संयाल ने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों की एकता और साहस का परिचायक है।
उन्होंने कहा—
“हमारे कदम पीछे नहीं हटे हैं, केवल इस चरण का समापन हुआ है। यदि रेलवे प्रबंधन ने हमारी समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो अगली बार बड़ा और निर्णायक आंदोलन होगा।”

संयाल ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को शांतिपूर्वक अपनी ड्यूटी पर लौटना चाहिए, परंतु आने वाले दिनों में संघ की ओर से किसी भी संभावित आंदोलन के लिए मानसिक तौर पर तैयार रहना होगा।

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रेलवे प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभागीय बैठकों में समस्याएँ बताने के बावजूद प्रबंधन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। रनिंग स्टाफ के अनुसार, थकान, ओवरटाइम, और उचित विश्राम न मिलने के कारण सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं, परंतु इन मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

कई कर्मचारियों ने कहा कि यदि मांगें समय पर नहीं मानी गईं, तो मंडल स्तर ही नहीं, जोन और बोर्ड स्तर पर भी आंदोलन की श्रृंखला शुरू की जा सकती है।

कर्मचारी वापस कार्य पर लौटे, पर उम्मीदें अधूरी
सभा के बाद कर्मचारियों ने अपनी-अपनी ड्यूटी को लौटना शुरू किया। हालांकि, अधिकांश कर्मचारियों के चेहरे पर असंतोष साफ दिखाई दे रहा था। उनका कहना था कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि रेलवे प्रबंधन के रवैये से तय होगा कि आगे आंदोलन कितना तीखा होगा।

कुल मिलाकर गुरुवार का दिन कर्मचारियों की एकता, अनुशासन और संयम का प्रतीक रहा। हड़ताल तो खत्म हो गई, लेकिन उम्मीदों का संघर्ष अब भी जारी है।

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