आसनसोल: आसनसोल में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने देश में बढ़ती धार्मिक बहसों और राजनीतिक बयानबाज़ी पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चुनावी मौसम नज़दीक आते ही मंदिर–मस्जिद जैसे संवेदनशील विषयों को अनावश्यक रूप से हवा दी जा रही है, जबकि आम जनता की मूल समस्याएँ—रोज़गार, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य—पीछे धकेल दी जाती हैं। उनके मुताबिक यह रणनीति जनता की भावनाओं का उपयोग करके राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश है, जिसे समझना आज बेहद ज़रूरी है।

रविवार की इस बैठक में सांसद ने कहा कि समाज को बांटने वाली बहसों से न तो किसी समुदाय का भला होता है और न ही क्षेत्र का विकास तेज़ होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “धार्मिक मुद्दे चुनाव का आधार नहीं बनने चाहिए। देश तब आगे बढ़ेगा जब राजनीतिक दल वास्तविक समस्याओं पर समाधान देंगे, न कि भावनाओं को उकसाकर माहौल गर्माएंगे।”
इसके साथ ही उन्होंने हाल के दिनों में कुछ राज्यों में धार्मिक स्थल संबंधी विवादों के बढ़ने पर चिंता जताई। उनके अनुसार, ऐसी चर्चाएँ जानबूझकर प्रमुख मुद्दों को ढकने के लिए की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे असल सवाल पूछें—बिजली कैसी है, रोजगार कितने मिले हैं, किसान को उसका हक मिला या नहीं।
इसी चर्चा के दौरान सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विपक्ष से संवाद के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में परस्पर संवाद बेहद आवश्यक है। “यदि प्रधानमंत्री सभी दलों के नेताओं को समान रूप से बुलाएँ, तो इससे संदेश जाएगा कि सरकार विपक्ष की बात को भी महत्व देती है। लोकतंत्र का मज़बूत होना इसी पर निर्भर करता है,” उन्होंने कहा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने के लिए है।

रविवार को जारी इस बयान में सांसद ने एक अलग मामले—एयरलाइन विवाद—पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह इंडिगो एयरलाइंस से जुड़े जिस विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरीं, वह गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने सवाल किया कि “अगर ऐसा कोई विवाद अन्य एयरलाइंस में नहीं हुआ, तो सिर्फ इंडिगो ही विवाद में क्यों घिरी? कहीं न कहीं प्रक्रियाओं में कमी या जिम्मेदारी तय न होने की स्थिति दिख रही है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित एजेंसियाँ जल्द रिपोर्ट पेश करेंगी और सत्य जनता के सामने आएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में सांसद द्वारा दिए जा रहे तीखे और स्पष्ट बयान चुनावी माहौल में खास प्रभाव छोड़ रहे हैं। रविवार का बयान भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। कई स्थानीय संगठनों और बुद्धिजीवियों ने सांसद के वक्तव्य को “मुद्दों पर आधारित राजनीति” की ओर लौटने का संकेत बताया है। इस बयान के साथ यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले दिनों में आसनसोल की राजनीति में धार्मिक बहसों के बजाय असल मुद्दों पर बहस तेज़ हो सकती है।















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