आसनसोल : बुधवार को शहर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए चार नए श्रम कोडों के विरोध में लेबर कमिश्नर कार्यालय तक जोरदार मार्च निकाला। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में पहुंचकर केंद्र सरकार को श्रमिक विरोधी बताने वाले नारे लगाए और श्रम कोडों को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।

प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता शाह आलम और प्रसनजीत पुईतुंडी ने किया। उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय श्रमिक समर्थक लोग भी मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने 21 तारीख को जारी केंद्र सरकार के उस गजट नोटिफिकेशन की प्रति भी सार्वजनिक रूप से जलाई, जिसके माध्यम से चारों श्रम कोडों को लागू करने की घोषणा की गई थी।
पत्रकारों से बातचीत में शाह आलम ने कहा कि कांग्रेस का यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि श्रमिकों के हक और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कोडों के जरिए श्रमिकों के दशकों पुराने अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, नए प्रावधानों के लागू होने से श्रमिकों को प्रतिदिन 12 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उन पर अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इन कोडों के तहत उद्योगपतियों और मालिक वर्ग को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे बिना किसी ठोस कारण या पूर्व सूचना के एक साथ कई श्रमिकों को नौकरी से निकाल सकें। इससे देशभर में करोड़ों मजदूरों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित होगा।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नए श्रम कोडों में श्रमिक कल्याण के प्रावधानों को कमजोर किया गया है, जबकि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दिया गया है। इससे न केवल असंगठित क्षेत्र प्रभावित होगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी असंतोष और अस्थिरता बढ़ेगी।

प्रदर्शन के दौरान लेबर कमिश्नर कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में कांग्रेस ने केंद्र सरकार से चारों श्रम कोडों को अविलंब वापस लेने की मांग की है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि श्रमिक अधिकार किसी भी लोकतांत्रिक देश की रीढ़ होते हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ देशहित के खिलाफ है। बुधवार को हुए इस प्रदर्शन को स्थानीय श्रमिक संगठनों का समर्थन भी मिला, जिससे विरोध को अतिरिक्त मजबूती मिली।
लेबर कमिश्नर कार्यालय परिसर में कांग्रेस का यह शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी प्रदर्शन दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।















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