दुर्गापुर : बुधवार को दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के दुर्गापुर मुख्यालय में कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया। लंबे समय से दबे आ रहे अनेक प्रशासनिक और कार्यस्थलीय मुद्दों के चलते विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही मुख्यालय परिसर में गहमागहमी बढ़ी, जब बड़ी संख्या में कर्मचारी परिसर के सामने इकट्ठा होने लगे।

कर्मचारियों के असंतोष ने पकड़ा उग्र रूप
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि परिवहन निगम के कई विभागों में कार्यप्रणाली लगातार अव्यवस्थित होती जा रही है, जिससे कर्मचारियों की कार्यशैली और सेवा गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।अधिकारियों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता की कमी, अनुचित दबाव, कार्य विभाजन में असमानता और तकनीकी स्टाफ की कमी जैसे मुद्दों ने लंबे समय से असंतोष को जन्म दिया था। बुधवार को यह असंतोष आंदोलन के रूप में सामने आ गया।एक ड्राइवर ने कहा—“हम हर दिन यात्रियों को समय पर पहुँचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंदरूनी व्यवस्था इतनी खराब है कि काम करना मुश्किल होता जा रहा है।”
संयुक्त संगठनों ने निकाला विरोध
बुधवार दोपहर कर्मचारी संगठनों की ओर से एक संयुक्त मিছিল निकाला गया, जो निगम के विभिन्न विभागों से गुजरते हुए मुख्य गेट पर पहुँचा।
नारेबाज़ी के बीच नेताओं ने कहा कि संगठन किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन अफसरों के खिलाफ है जो कर्मचारियों के मूल अधिकारों और सुविधाओं को लगातार अनदेखा कर रहे हैं।संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि कामकाज बाधित करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन जब लगातार शिकायतें अनसुनी कर दी जाएँ, तो शांतिपूर्ण विरोध ही अंतिम रास्ता रह जाता है।
नेताओं के बयान से गरमा गया माहौल
धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने कहा—“कर्मचारियों की परेशानियाँ वर्षों पुरानी हैं। चाहे वाहन की कमी हो, उपकरणों की खराबी, सुरक्षा संबंधी मुद्दे या वेतन भुगतान में देरी—इन सब पर कोई ठोस पहल नहीं हो रही। अधिकारी फाइलों में वादे करते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदलता।”नेताओं ने यह भी दावा किया कि निगम के कई रूटों पर स्टाफ की भारी कमी होने के बावजूद कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव डाला जा रहा है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
मुख्यालय में पूरे दिन रही हलचल
बुधवार का दिन SBSTC मुख्यालय में लगातार हलचल भरा रहा।कई विभागों के कर्मचारी बार-बार बाहर निकलकर धरना स्थल पर जाते रहे।स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी, ताकि किसी भी तरह का अव्यवस्था न हो।आसपास के क्षेत्रों में आम लोग भी इस आंदोलन को लेकर चर्चा करते दिखे।

अभिभावकों व यात्रियों में चिंता
परिवहन निगम की बसें प्रतिदिन हजारों यात्रियों को ले जाती हैं। ऐसे में आंदोलन लंबा चलने की आशंका से नियमित यात्रियों में चिंता बढ़ गई है।
कुछ ने कहा कि यदि विरोध तेज हुआ तो रूटों पर बसों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।एक यात्री का कहना था—“हम रोज़ाना बस पर निर्भर रहते हैं। अगर यह आंदोलन बढ़ा, तो दिक्कतें बढ़ेंगी।”
आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत
कर्मचारी संगठनों ने बुधवार शाम स्पष्ट कहा कि यदि अधिकारियों ने बातचीत के लिए ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा। इसके तहत—ज़ोनल कार्यालयों में धरना डिपो स्तर पर विरोध रैली अधिकारियों के कार्यालयों का प्रतीकात्मक घेराव जैसे कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। दुर्गापुर में बुधवार का दिन परिवहन कर्मचारियों के असंतोष, विरोध और प्रशासनिक हलचल से भरा रहा। अब सभी की निगाहें अधिकारियों पर हैं कि वे कब तक वार्ता की पहल करते हैं और कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।















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