आसनसोल में सियासी टकराव तेज, कोयला–बालू मुद्दा केंद्र में

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आसनसोल : विधानसभा चुनावों की आहट के साथ शिल्पांचल की राजनीति अब पूरी तरह गर्मा गई है। आरोप–प्रत्यारोप के बीच कोयला और बालू तस्करी की फाइलें फिर से सियासत के केंद्र में पहुंच चुकी हैं। आसनसोल, बाराबनी, पांडवेश्वर और आसपास के कोयला–क्षेत्र इन दिनों राजनीतिक बयानबाज़ी और विरोध–प्रदर्शनों का हॉटस्पॉट बन गए हैं। बीजेपी और टीएमसी द्वारा एक-दूसरे पर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों ने पुलिस प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया है। जनता पूछ रही है – “जब सभी नेता खुलेआम तस्करी का नाम ले रहे हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?”

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तिराट में तनाव के बाद सियासत में उबाल

बुधवार शाम आसनसोल दक्षिण विधानसभा में बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पाल के जनसंपर्क अभियान के दौरान जो कुछ हुआ, उसने पूरे जिले में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। आरोप है कि ‘पाड़ाय-पाड़ाय दीदीभाई’ अभियान के दौरान टीएमसी समर्थकों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही।वीडियो में महिलाओं का समूह विधायक की कार के सामने बैठा दिखा, जबकि कुछ युवक लगातार सवाल पूछते नजर आए। मौके पर पहुंची पुलिस की भूमिका पर ही अब उंगलियां उठ रही हैं।इसके बाद विधायक समर्थकों ने कालीपहाड़ी मोड़ पर प्रदर्शन किया और जीटी रोड कुछ देर के लिए जाम रहा।

बीजेपी का आरोप – “बालू तस्करों के इशारे पर हुआ हमला”

अग्निमित्रा पाल ने गुरुवार को नया वीडियो जारी कर कहा कि—“अवैध बालू कारोबार बंद कराने की वजह से यह सब किया जा रहा है। टीएमसी पुलिस का इस्तेमाल कर हमें डराना चाहती है। लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं।”विधायक ने यह भी कहा कि दक्षिण विधानसभा में 15 वर्षों में विकास शून्य रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क—हर क्षेत्र में जनता परेशान है। उनका दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण अवैध मतदाताओं के नाम हट रहे हैं, जिसका गुस्सा टीएमसी उतार रही है।

टीएमसी का पलटवार – “जनता ने किया विरोध, बीजेपी कर रही नाटक”

जिला तृणमूल अध्यक्ष व पांडवेश्वर विधायक नरेन चक्रवर्ती ने BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा—“विधायक का जनता से कोई जुड़ाव नहीं है। चुनाव आते ही दीदीभाई बनकर पैरवी शुरू की है। जनता के सवालों से घबराकर अब आरोप–प्रचार कर रही हैं।”नरेन ने दावा किया कि —“विधायक के साथ दो कुख्यात कोयला कारोबारियों को देखा गया। इसकी फोटो भी सामने है। बीजेपी तस्करी को संरक्षण दे रही है।”टीएमसी नेता ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जनता के साथ रैली निकालकर बीजेपी के दमन की राजनीति का जवाब दिया जाएगा।

पुलिस पर सवाल – क्या होगा आगे?

दोनों पार्टियों के आक्रामक आरोपों के बीच पुलिस प्रशासन निशाने पर है।सवाल उठ रहे हैं कि—अगर टीएमसी के पास ‘कोयला माफियाओं’ की तस्वीरें हैं, तो शिकायत क्यों नहीं की गई?क्या पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर जांच करेगी?बीजेपी विधायक ने बालू तस्करी बंद कराने का दावा किया, तो एफआईआर क्यों नहीं?क्या पुलिस राजनीतिक दबाव से बचकर निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी?अभी तक कमिश्नरेट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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शिल्पांचल की पृष्ठभूमि – क्यों गर्म है मुद्दा?

पिछले तीन महीनों में ईडी और सीबीआई द्वारा शिल्पांचल में की गई बड़ी कार्रवाई से माहौल पहले ही संवेदनशील था। ईडी की बालू तस्करी पर छापेमारी बंगाल–झारखंड बॉर्डर पर 44 जगह सर्च ऑपरेशन करोड़ों की नकदी व दस्तावेज की बरामदगी कोयला सिंडिकेट नेटवर्क का खुलासा बीजेपी इस मुद्दे को लगातार उठा रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीति से प्रेरित बताती है। चुनाव नजदीक आते ही दोनों दल कोयला–बालू तस्करी को मुख्य हथियार बनाकर जनता को साधने में जुटे हैं।

चुनावी तापमान रोज बढ़ रहा है

आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में सियासत कोयला और बालू तस्करी के इर्द–गिर्द घूम रही है।दोनों दलों के बीच शब्दयुद्ध तेज है।जनता परेशान है, प्रशासन मौन है, और आने वाला चुनाव इस विवाद को और गहरा करने वाला है।आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि पुलिस कार्रवाई करेगी या यह मुद्दा भी चुनावी धुआँ बनकर रह जाएगा।

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