आसनसोल/औरंगाबाद : शुक्रवार को रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में सोननगर ट्रैक्शन सब स्टेशन (TSS) में हुई बहुमूल्य ट्रांसफॉर्मर उपकरण चोरी कांड का बड़ा खुलासा सामने आया। करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के कॉपर तेल, नट-बोल्ट और महत्वपूर्ण मशीनरी गायब होने की जांच में पुलिस व रेलवे की विशेष टीम (SIT) ने व्यापक तकनीकी पड़ताल, सीसीटीवी क्लू और गुप्त सूत्रों के आधार पर 15 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरोह लंबे समय से बिहार-झारखंड-बंगाल की सीमाओं पर रेलवे संपत्ति को निशाना बनाता रहा है।

शुक्रवार को अचानक तेज हुई कार्रवाई
तफ्तीश कर रही SIT व आरपीएफ दहेरी की संयुक्त टीम ने शुक्रवार सुबह रेलवे स्टेशन के पिछवाड़े खड़ी एक पिकअप वैन से संदिग्ध गतिविधि पकड़कर रमेेश चौधरी नामक युवक को हिरासत में लिया। वैन से मिले भारी मात्रा में कॉपर वायर ने जांच को नया मोड़ दिया। पूछताछ के दौरान आरोपी से मिले संकेतों से टीम ने तुरंत सोननगर भवर क्षेत्र और केशवपुर इलाके में दबिश देकर स्कॉर्पियो और बोलेरो वाहनों समेत 14 अन्य आरोपियों को धर दबोचा।
सूत्रों से मिला बड़ा सच—कबाड़ दुकानों की श्रृंखला सक्रिय
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह चोरी किए गए कॉपर तार और अन्य ट्रांसफॉर्मर पुर्जों को आसनसोल के दिल्ली-कोलकाता मार्ग, ज्योति नगर स्थित कबाड़ दुकानों में बेच देता था। आरोपी स्वीकृतियों के अनुसार, चोरी का माल पिघलाकर (मेल्ट कर) पुनः बेचने की तैयारी भी की जाती थी ताकि पहचान की कोई संभावना न बचे।
टीम ने बताया कि यह गिरोह वर्षों से रेलवे की नई परियोजनाओं के ट्रांसफॉर्मरों को निशाना बनाता रहा है। बिहार के समस्तीपुर, सकरी, पंडौल से लेकर झारखंड के कई रेलवे सर्किलों में कॉपर वायर चोरी के मामलों में इनकी सक्रियता पाई गई है।
दो महीने पहले भी किया था बड़ा वारदात
जांच अधिकारियों ने बताया कि तकरीबन दो महीने पहले मुगलसराय से चलने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की लगेज बोगी से भी बड़े पैमाने पर माल गायब किया गया था। चोरी के बाद सामान को अनुग्रह स्टेशन के आगे ट्रैक किनारे फेंक दिया गया था, जिससे रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा। प्रारंभिक पूछताछ में इस घटना में भी इसी गिरोह की भूमिका सामने आई है।
गिरफ्तार अपराधियों की सूची
गिरफ्तार आरोपियों में टार्जन चौधरी, रमेेश चौधरी, विश्वजीत चौधरी, दिनेश चौधरी, राजेश चौधरी, सुरज गुप्ता, अमन कुमार, मो. आलम मियां, राजन चौधरी, सुनील सिंह, जितेंद्र झा, जिउत चौधरी (सभी दुर्गापुर, जिला बर्धमान, पश्चिम बंगाल), जबकि तपस चौधरी (नदिया) और ललन चौधरी (साहेबगंज, झारखंड) शामिल हैं।
सभी से गहन पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के कई सदस्य तकनीकी रूप से दक्ष हैं और ट्रांसफॉर्मर की संरचनाओं की गहरी जानकारी रखते हैं, जिससे चोरी करना इनके लिए आसान हो जाता था।
मौके से मिली बड़ी बरामदगी
छापेमारी के दौरान लगभग 12 क्विंटल कॉपर वायर, एक पिकअप वैन, एक स्कॉर्पियो, एक बोलेरो और आठ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जांच दल का अनुमान है कि चोरी का दायरा अभी और बड़ा है और कई अन्य घटनाओं में भी यही गैंग सक्रिय रहा है।
बड़े मास्टरमाइंड की तलाश तेज
SIT अब गिरोह के उन संचालकों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जो इन अपराधियों को निर्देश और सुरक्षा प्रदान करते थे। प्राथमिक इनपुट के अनुसार, आसनसोल से लेकर नदिया-साहेबगंज बेल्ट तक कई कबाड़ी कारोबारी और मध्यस्थ इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

रेलवे ने और मजबूत करने की शुरू की तैयारी
शुक्रवार देर शाम रेलवे की ओर से एहतियातन कई ज़ोन में हाई-टेक डिजिटल निगरानी लगाने की तैयारी की पुष्टि हुई। अधिकारियों का कहना है कि बड़े रेलवे यार्ड, TSS और नये ट्रांसफॉर्मर स्थलों पर 360-डिग्री नाइट-विजन कैमरे, ऑटो-अलर्ट सेंसर और ड्रोन निगरानी व्यवस्था अब अनिवार्य रूप से लागू होगी।
जांच आगे बढ़ने की उम्मीद
जांचकर्ताओं के अनुसार, 15 गिरफ्तारियां केवल शुरुआती कदम हैं। अब पुलिस चोरी के पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और कबाड़ कारोबार की श्रृंखला की तह तक जाएगी। रेलवे अधिकारियों ने माना कि इस गिरोह के पास तकनीकी विशेषज्ञता और योजनाबद्ध तरीके से चोरी करने की क्षमता थी, जो किसी सामान्य अपराधी समूह के बस की बात नहीं।
शुक्रवार की इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े चोरी कांड का पर्दाफाश किया है, बल्कि रेलवे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगे की पूछताछ से इस नेटवर्क की पूरी परतें खुलने की आशंका है।















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