नागरिकता आशंका ने ली जान, दुर्गापुर महिला आत्महत्या से सनसनी

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दुर्गापुर :  दुर्गापुर के 9 नंबर वार्ड अंतर्गत हर्षवर्धन इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। नागरिकता को लेकर मन में उपजे भय और मानसिक तनाव के कारण एक महिला द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने की खबर ने स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर फैल रहे डर और भ्रम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मृतका की पहचान 37 वर्षीय सुबर्णा गुई साहा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से दमदम के नागरबाजार इलाके की निवासी थीं। विवाह के बाद वह दुर्गापुर स्टील सिटी के हर्षवर्धन क्षेत्र स्थित डीवीसी कॉलोनी में अपने पति रंजीत गुई के साथ रह रही थीं। रंजीत गुई डीवीसी में कर्मचारी हैं। दंपती का सात वर्षीय एक पुत्र भी है, जो अब मां की छाया से वंचित हो गया।

परिजनों के अनुसार, सुबर्णा बीते कुछ दिनों से गहरे मानसिक दबाव में थीं। परिवार का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर फैले माहौल ने उनके मन में अनावश्यक डर पैदा कर दिया था। सुबर्णा के जीजा शिवशंकर साहा ने बताया कि सुबर्णा का नाम स्वयं मतदाता सूची में दर्ज था और उनके पास वैध वोटर कार्ड भी मौजूद था, लेकिन उनके माता-पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद वह लगातार चिंतित रहने लगी थीं।

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परिजनों का कहना है कि सुबर्णा को यह आशंका सताने लगी थी कि कहीं माता-पिता के नाम न होने के कारण उसकी नागरिकता पर भी सवाल न उठ जाए। इसी भय ने धीरे-धीरे गंभीर मानसिक तनाव का रूप ले लिया। परिवार वालों के अनुसार, उन्होंने कई बार सुबर्णा को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अंदर ही अंदर घुटती रही और अंततः यह भयावह कदम उठा लिया।

घटना की सूचना मिलते ही दुर्गापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

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इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं को लेकर आम लोगों में फैले भ्रम और डर को दूर करने के लिए स्पष्ट और संवेदनशील संवाद करना चाहिए। नागरिकों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि किसी तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटि के कारण उनकी नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है।

फिलहाल, सुबर्णा की मौत ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ समाज में फैलने वाले भय और अफवाहें किस तरह आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाल सकती हैं।

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