आसनसोल : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के नवनियुक्त चेयरमैन बी. साईराम ने पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन सक्रियता दिखाते हुए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के प्रमुख परिचालन क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया। इस क्षेत्रीय निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कोयला उत्पादन, प्रेषण व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण, पुनर्वास कार्यों तथा जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों का प्रत्यक्ष आकलन करना था। उनके साथ सीआईएल के कार्यकारी निदेशक (उत्पादन) आनंद भी मौजूद रहे।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब कोल इंडिया गुणवत्ता, मांग में उतार-चढ़ाव और लाभप्रदता जैसी कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में नए चेयरमैन का जमीनी स्तर पर उतरकर हालात समझना उद्योग जगत में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बी. साईराम ने अपने दौरे की शुरुआत सोनेपुर बाजारी परियोजना से की। सोनेपुर बाजारी व्यू प्वाइंट पर ईसीएल के सीएमडी सतीश झा, निदेशक (वित्त) मोहम्मद अंजार आलम, निदेशक (तकनीकी-संचालन) नीलाद्री रॉय और निदेशक (तकनीकी-परियोजना एवं योजना) गिरीश गोपीनाथन नायर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। यहां उन्होंने खनन गतिविधियों, सुरक्षा मानकों और उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान चेयरमैन ने कोयला उत्पादन और प्रेषण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली पर विशेष चर्चा की और यह स्पष्ट किया कि आने वाले समय में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। ईसीएल प्रबंधन ने भी उत्पादन लक्ष्य हासिल करने और जिम्मेदार व सतत खनन पद्धतियों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दौरे के क्रम में बी. साईराम ने सोनेपुर बाजारी क्षेत्र में स्थित पुनर्वास स्थल का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने स्थानीय विस्थापित परिवारों और समुदाय के लोगों से बातचीत की। चेयरमैन ने कहा कि पुनर्वास केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन देने की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को पुनर्वास योजनाओं में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने के निर्देश दिए।
इसके बाद उन्होंने केंदा क्षेत्र की न्यू केंदा ओपन कास्ट परियोजना, कुनुस्तोड़िया क्षेत्र की नॉर्थ सियारसोल और नारायणकुड़ी ओसीपी तथा बांकोला क्षेत्र के अंतर्गत नाकराकोंदा कुमारीडीह ‘बी’ ओसीपी का निरीक्षण किया। हर परियोजना में उन्होंने उत्पादन क्षमता, मशीनरी की स्थिति, श्रमिकों की सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों की जानकारी ली।
चेयरमैन ने कॉरपोरेट जॉइंट कंसल्टेटिव कमेटी (जेसीसी) के सदस्यों के साथ भी संवाद किया। इस बैठक में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बी. साईराम ने कहा कि प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, उतनी ही बेहतर कार्यक्षमता सामने आएगी। उन्होंने कर्मचारी प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और रचनात्मक सहभागिता पर जोर दिया।
दौरे के अंतिम चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न परिचालन क्षेत्रों के प्रदर्शन का आंकलन किया गया और उत्पादन, गुणवत्ता, लागत नियंत्रण तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

गौरतलब है कि कोल इंडिया के नए चेयरमैन के सामने कई अहम चुनौतियां हैं। कोयले की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें, ताप विद्युत संयंत्रों से मांग में आई कमी और हाल के वर्षों में मुनाफे में गिरावट कंपनी के लिए चिंता का विषय रही है। इसके साथ ही कोयला तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
बी. साईराम से यह उम्मीद की जा रही है कि अपने 34 वर्षों से अधिक के अनुभव और तकनीकी समझ के बल पर वे कोल इंडिया को फिर से मजबूती की राह पर ले जाएंगे। वह पहले नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक रह चुके हैं और इससे पहले सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में निदेशक (तकनीकी-योजना एवं परियोजना) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। एनआईटी रायपुर से खनन अभियंता और ऊर्जा प्रबंधन में पीजीडीएम की डिग्री रखने वाले बी. साईराम का कार्यकाल 31 मार्च 2028 तक रहेगा।
उनका यह शुरुआती दौरा यह संकेत देता है कि आने वाले समय में कोल इंडिया में गुणवत्ता, जवाबदेही और जमीनी सुधारों पर विशेष जोर दिया जा सकता है।















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