कुल्टी : रविवार को मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के नियामतपुर से सटे लछीपुर रेड लाइट एरिया में सामने आए आंकड़ों ने प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। इस संवेदनशील इलाके के चार प्रमुख मतदान केंद्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रारंभिक सर्वे में जहां इन बूथों पर कुल 3,627 मतदाता दर्ज थे, वहीं ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद करीब 40 प्रतिशत नाम कट जाने की पुष्टि हुई है। इस अचानक और बड़ी कटौती ने पूरे इलाके में चर्चा और सियासी हलचल को जन्म दे दिया है।

आंकड़ों ने खड़े किए सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से हटाए गए 742 नामों में 139 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 69 मतदाता क्षेत्र छोड़कर अन्य स्थानों पर चले गए हैं। सबसे गंभीर स्थिति उन 534 नामों को लेकर है, जिनके बारे में प्रशासन को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। बताया गया है कि इन लोगों ने एनुमरेशन फॉर्म तो लिया, लेकिन उसे जमा नहीं किया। इसके अलावा, वर्ष 2002 की मतदाता सूची से वर्तमान सूची का मिलान करते समय 684 मतदाताओं का रिकॉर्ड आपस में मेल नहीं खा सका, जिससे संदेह और गहरा गया है।
विपक्ष ने लगाए ‘भूतिया मतदाता’ के आरोप
ड्राफ्ट सूची सामने आते ही विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया। भाजपा और माकपा नेताओं का आरोप है कि वर्षों से इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे नाम सूची में शामिल थे, जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था। विपक्ष का दावा है कि इन्हीं कथित ‘भूतिया मतदाताओं’ के सहारे चुनावी गणित साधा जाता रहा है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हटाए गए नामों में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो इस इलाके की सामाजिक संरचना को देखते हुए कई सवाल खड़े करता है।
बांग्लादेशी कनेक्शन की आशंका
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को और गंभीर बनाते हुए रेड लाइट एरिया में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि मतदाता सूची की यह सफाई दरअसल लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ियों को उजागर कर रही है। विपक्ष ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप किए खारिज
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। सत्तापक्ष का कहना है कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जीवनशैली और परिस्थितियां सामान्य इलाकों से अलग हैं। तृणमूल नेताओं का तर्क है कि रेड लाइट एरिया में काम करने वाली कई महिलाएं अपनी पारिवारिक पहचान छिपाकर यहां आती हैं और अक्सर स्थान बदलती रहती हैं। प्रशासनिक जांच या डर के कारण भी कई लोग अचानक इलाके से चले जाते हैं, जिससे मतदाता सूची में अस्थिरता बनी रहती है।

बीएलओ की भूमिका पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस ने इस गड़बड़ी के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि फॉर्म वितरण और संग्रह की प्रक्रिया में लापरवाही के कारण कई नाम स्वतः कट गए। सत्तापक्ष ने बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
जांच और राजनीति साथ-साथ
रविवार को पूरे दिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बैठकों और चर्चाओं का दौर चलता रहा। प्रशासनिक स्तर पर भी यह संकेत मिले हैं कि नाम कटने के कारणों की गहन समीक्षा की जाएगी। जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
कुल मिलाकर, लछीपुर रेड लाइट एरिया में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने की घटना ने एक बार फिर मतदाता सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई किसके पक्ष में जाती है और इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है।















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