बांग्लादेश घटनाओं पर आक्रोश, प्रधानमंत्री से सख्त कदम उठाने की मांग

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आसनसोल : सोमवार को आसनसोल में बांग्लादेश से जुड़ी घटनाओं को लेकर गहरा आक्रोश सामने आया। पड़ोसी देश में हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचार, भारतीय दूतावास पर हमले और सोशल मीडिया पर भारत विरोधी टिप्पणियों को लेकर स्थानीय व्यापारिक और सामाजिक संगठनों में चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभूनाथ झा ने भारत के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत पत्र भेजकर केंद्र सरकार से कठोर और निर्णायक कदम उठाने की मांग की है।

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अपने पत्र में शंभूनाथ झा ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार सामने आ रही घटनाएं केवल वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय नहीं हैं, बल्कि भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि सोशल मीडिया मंचों पर जिस तरह से भारत के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां की जा रही हैं, वह अब सहनशीलता की सीमा से बाहर जा चुका है।

चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव ने सरकार से आग्रह किया कि बांग्लादेश के प्रति भारत की नीतियों पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने सबसे पहले भारत से बांग्लादेश को भेजे जाने वाले सभी प्रकार के सामानों के निर्यात पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक वहां भारत और हिंदुओं के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया बना रहेगा, तब तक किसी भी प्रकार का व्यापारिक सहयोग उचित नहीं ठहराया जा सकता।

पत्र में यह भी मांग की गई कि भारत आने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा व्यवस्था पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। शंभूनाथ झा का कहना है कि मौजूदा हालात में बांग्लादेश के नागरिकों के भारत आगमन पर सख्ती आवश्यक हो गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो बांग्लादेशी नागरिक वर्तमान में भारत में रह रहे हैं, उन्हें विशेष सरकारी मेहमानों को छोड़कर शीघ्र देश छोड़ने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक पहले ही भारत छोड़कर लौट चुके हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे किसी भी परिस्थिति में दोबारा अवैध रूप से भारत में प्रवेश न कर सकें। इसके लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और चौकसी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

शंभूनाथ झा ने सीमा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाए। साथ ही, अवैध रूप से पैसे लेकर भारत में घुसपैठ कराने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल जैसी कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।

पत्र में यह मांग भी शामिल है कि भारत द्वारा बांग्लादेश को दी गई भूमि को अविलंब वापस लिया जाए और दोनों देशों के बीच हुए सभी नदी जल बंटवारे के समझौतों को तत्काल रद्द किया जाए। उनका कहना था कि जब एक देश लगातार भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हो, तो ऐसे समझौते बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

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इसके अलावा, भारत द्वारा बांग्लादेश में जिन थर्मल पावर परियोजनाओं और रेलवे परियोजनाओं में सहयोग दिया जा रहा है, उन सभी पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी पत्र में की गई है। शंभूनाथ झा ने कहा कि भारत का सहयोग तभी तक उचित है, जब तक पड़ोसी देश मित्रवत व्यवहार करे।

पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश की हालिया गतिविधियों से भारत की जनता आहत और आक्रोशित है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उपरोक्त सभी बिंदुओं पर शीघ्र और ठोस निर्णय लिए जाएं।

कुल मिलाकर, सोमवार को उठी यह आवाज केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि उस जनभावना की अभिव्यक्ति मानी जा रही है, जो बांग्लादेश में हो रही घटनाओं को लेकर देशभर में धीरे-धीरे मुखर होती जा रही है।

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