जांच एजेंसियों के बावजूद रानीगंज में कोयला-बालू तस्करी बेखौफ

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रानीगंज :  बुधवार को आसनसोल-दुर्गापुर शिल्पांचल में अवैध खनन और तस्करी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए। एक ओर जहां केंद्रीय जांच एजेंसियां हजारों करोड़ रुपये के कोयला तस्करी मामलों की पड़ताल में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर रानीगंज इलाके में अवैध कोयला और बालू का कारोबार खुलेआम जारी रहने की चर्चा तेज है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई और दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।

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बताया जाता है कि रानीगंज क्षेत्र में कोयला तस्करी का नेटवर्क पहले की तरह सक्रिय है। केंद्र और राज्य सरकारें भले ही कोयला चोरी पर लगाम कसने के लिए लगातार कदम उठा रही हों, लेकिन तस्कर पुलिस और निगरानी एजेंसियों को चकमा देकर अपना धंधा चला रहे हैं। खासकर रानीगंज और उसके आसपास के इलाकों में यह काला कारोबार अधिक दिखाई देता है।

जानकारी के अनुसार, तस्करों ने ईसीएल की ओपन कास्ट परियोजनाओं को निशाने पर ले रखा है। कुनुस्तोड़िया क्षेत्र के अंतर्गत नारायणकुड़ी ओसीपी से रोजाना बड़ी मात्रा में कोयला चोरी होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा निमचा और कांटागोड़िया जैसे इलाकों से भी कोयला लाकर रानीगंज में भंडारण किया जाता है, जहां से आगे इसकी आपूर्ति की जाती है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि चोरी का कोयला साइकिल, वैन-रिक्शा और टोटो जैसे छोटे वाहनों से दिनदहाड़े ढोया जाता है। कई बार क्षमता से अधिक कोयला लादकर वैन को पीछे से बाइक के सहारे धकेलते हुए ले जाया जाता है। हैरानी की बात यह है कि कोयला लदे वाहन ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में भी आसानी से निकल जाते हैं, जिससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सूचना मिलने पर वे लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि इन कार्रवाइयों का असर जमीन पर कम ही दिखाई देता है। यही वजह है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर अपना अवैध कारोबार जारी रखे हुए हैं।

इधर, रानीगंज के साथ-साथ दामोदर नदी के किनारे बालू तस्करी भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लभपुर, नूपुर, बेलुनिया और नारायणकुड़ी जैसे इलाकों में नदी से अवैध रूप से बालू निकासी की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि रात के अंधेरे और तड़के सुबह बालू को बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जाता है।

हालांकि बल्लभपुर के दामोदर नदी घाट से बालू निकालने का ठेका केके मिनरल्स को मिला हुआ है, लेकिन आरोप है कि चालान व्यवस्था में गड़बड़ी कर अवैध बालू निकासी की जा रही है। बताया जाता है कि नदी के बीच जेसीबी मशीनें लगाकर रोजाना बड़ी संख्या में बालू लदे ट्रक निकाले जा रहे हैं। यहां तक कि नदी के भीतर झोपड़ीनुमा ढांचे भी बना लिए गए हैं।

केके मिनरल्स के खिलाफ राज्य के सिंचाई मंत्री से शिकायत किए जाने की भी चर्चा है। आरोप है कि फर्जी चालान की आड़ में अवैध बालू निकासी जारी है, खासकर ट्रैक्टरों के जरिए। वहीं, भारी वाहनों में ओवरलोड बालू ले जाने की शिकायतें भी आम हैं।

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इसके अलावा कुनुस्तोड़िया क्षेत्र के बेलबाद रेल साइडिंग से ईसीएल के कोयले की चोरी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस अवैध कारोबार में कुछ अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की मिलीभगत है। यही कारण बताया जा रहा है कि न तो पुलिस, न सीआईएसएफ और न ही ईसीएल के उच्च स्तर से कोई ठोस कार्रवाई सामने आ रही है।

हालांकि संबंधित विभागों का दावा है कि सूचना के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन बुधवार को भी रानीगंज में अवैध कोयला और बालू कारोबार को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलने जैसा माहौल बना दिया है।

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