रानीगंज : गुरुवार का दिन रानीगंज के चपुई कोलियरी क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक बन गया, जब देश सेवा में तैनात बीएसएफ जवान गणेश यादव की असामयिक शहादत की खबर ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। जिस जवान ने सीमा पर देश की रक्षा की जिम्मेदारी निभाई, वही अपने घर में पत्नी को बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवा बैठा। यह हादसा न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरी पीड़ा छोड़ गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गणेश यादव पिछले दस वर्षों से सीमा सुरक्षा बल में कार्यरत थे और वर्तमान में महाराष्ट्र के पुणे स्थित बीएसएफ कैंप में तैनात थे। वे पिछले एक वर्ष से अपनी पत्नी प्रियंका यादव और तीन छोटे बच्चों के साथ वहीं रह रहे थे। गुरुवार से पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन 23 दिसंबर की सुबह अचानक रसोई में पाइपलाइन गैस के रिसाव से आग लग गई। आग की लपटों में घिरी पत्नी को देखकर गणेश यादव बिना पलभर सोचे उसे बचाने के लिए कमरे में कूद पड़े।

इस साहसिक प्रयास में पत्नी की जान तो बच गई, लेकिन गणेश यादव स्वयं गंभीर रूप से झुलस गए। आग की पीड़ा से तड़पते हुए वे घर से बाहर निकले और पड़ोसियों से मदद मांगी। पड़ोसियों ने तत्काल कंबल लाकर दोनों को आग से बचाने का प्रयास किया और अस्पताल पहुंचाया। दुर्भाग्यवश अस्पताल ले जाते समय ही जवान गणेश यादव ने दम तोड़ दिया, जबकि पत्नी प्रियंका यादव का इलाज जारी है।
गुरुवार सुबह बीएसएफ के जवानों द्वारा गणेश यादव का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक आवास चपुई लाया गया। जैसे ही शव पहुंचा, इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों लोग उनके घर के बाहर जमा हो गए। हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘गणेश यादव अमर रहें’ के नारे लगाए। वातावरण देशभक्ति और शोक से भर गया।
हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के धनी गणेश यादव को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। दाह संस्कार डामरा स्थित दामोदर नदी घाट पर किया गया, जहां नदिया जिले से आई बीएसएफ की दस सदस्यीय टीम ने एयर फायरिंग कर शहीद जवान को सलामी दी। पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

सबसे भावुक क्षण तब आया, जब गणेश यादव के चार वर्षीय पुत्र आकर्ष ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। हजारों लोगों ने मौन श्रद्धांजलि अर्पित कर उस वीर को नमन किया, जिसने परिवार और कर्तव्य—दोनों के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
गणेश यादव अपने पीछे बुजुर्ग माता-पिता, भाई-भाभी, पत्नी और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए। उनकी शहादत ने यह साबित कर दिया कि सच्चा सैनिक हर परिस्थिति में साहस और त्याग की मिसाल बनता है।















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