काजोड़ा में ज़मीन धंसी, खनन लापरवाही से ग्रामीणों की नींद उड़ी

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अंडाल (दुर्गापुर) : रविवार तड़के अंडाल क्षेत्र के खास काजोड़ा कोलियरी इलाके में अचानक ज़मीन धंसने की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। सुबह होते ही स्थानीय लोगों ने देखा कि उनके घरों से महज़ 50 से 100 मीटर की दूरी पर एक विशाल गड्ढा बन चुका है। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। कई परिवारों ने एहतियातन जरूरी सामान समेटकर घर छोड़ना शुरू कर दिया।

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स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिस स्थान पर धंसान हुआ है, वहां पहले खेती होती थी। अब वही उपजाऊ जमीन देखते ही देखते गड्ढे में तब्दील हो गई। किसानों का कहना है कि इस घटना से उनकी महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई और भविष्य की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो धंसान का दायरा और बढ़ सकता है, जिससे घरों को भी खतरा हो सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के अधिकारियों को जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद खास काजोड़ा कोलियरी के मैनेजर प्रभाकर कुमार पासवान मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि इस इलाके में कई पुरानी खदानें मौजूद रही हैं। संभव है कि वे खदानें अधिक गहरी न होने के कारण समय के साथ कमजोर हो गई हों और उसी का परिणाम यह धंसान हो।

कोलियरी प्रबंधन की ओर से दावा किया गया कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। खतरे की आशंका को देखते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही इलाके की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इस बीच, घटनास्थल पर पहुंचे तृणमूल कांग्रेस नेता बिष्णुदेव नोनिया ने ईसीएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में ज़मीन धंसने की घटना हुई हो। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं साफ तौर पर खनन प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती हैं। नोनिया के अनुसार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कई बार ईसीएल अधिकारियों से सैंड और ऐश पैकिंग के माध्यम से स्थायी समाधान की मांग की थी, लेकिन इस पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ईसीएल अपने कर्मचारियों के लिए तो आधुनिक आवास और सुविधाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन जो गरीब किसान और मजदूर पिछले 30-40 वर्षों से इस क्षेत्र में रहकर खेती और मेहनत-मजदूरी से जीवन यापन कर रहे हैं, उनके पुनर्वास और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति क्यों नहीं बनाई जा रही।

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लगातार हो रही धंसान की घटनाओं से पूरे खनन क्षेत्र में रहने वाले लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा व पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए।

रविवार को हुई इस घटना ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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