दुर्गापुर : सोमवार को दुर्गापुर शहर उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बन गया, जब अपनी लंबित मांगों को लेकर अस्थायी नगर स्वास्थ्य कर्मियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री की प्रस्तावित सभा से ठीक पहले हुए इस आंदोलन ने न केवल नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

दुर्गापुर नगर निगम के अंतर्गत कार्यरत अस्थायी स्वास्थ्य कर्मियों ने सिटी सेंटर इलाके में स्थित निगम भवन के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू किया। हाथों में तख्तियां लिए करीब 175 से अधिक कर्मचारी धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ और निगम से जुड़ी कई स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ गईं।
वर्षों से सेवा, लेकिन अधिकार नहीं
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि उनसे वही काम लिया जाता है, जो स्थायी कर्मचारियों से लिया जाता है, लेकिन वेतन और सुविधाओं के मामले में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
कर्मियों की प्रमुख मांगों में अस्थायी कर्मचारियों का स्थायीकरण, न्यूनतम ₹15,000 मासिक वेतन, तथा ईएसआई और पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ शामिल है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा मानदेय से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन की अपील, लेकिन नहीं माने कर्मचारी
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही दुर्गापुर नगर निगम के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत जानने की कोशिश की और उन्हें समझाते हुए काम पर लौटने की अपील की। उपाध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा और समाधान की दिशा में प्रयास होंगे।
हालांकि, कर्मचारियों ने इस अपील को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार और शहरव्यापी आंदोलन की भी संभावना जताई गई।
कर्मियों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि सरकार और नगर निगम केवल चुनाव और सभाओं के समय उनकी जरूरत महसूस करते हैं, लेकिन बाद में उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
मुख्यमंत्री की सभा से पहले बढ़ी चिंता
मुख्यमंत्री की प्रस्तावित सभा से ठीक पहले हुए इस आंदोलन ने प्रशासन और सत्ताधारी दल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि यदि आंदोलन लंबा चला, तो इसका असर न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी इसका संदेश जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों की मांगें जायज हैं और लंबे समय से लंबित हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।
फिलहाल, दुर्गापुर में अस्थायी स्वास्थ्य कर्मियों का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें अब नगर निगम तथा राज्य प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।















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