आशा कर्मियों का आक्रोश, वेतन मांग पर आसनसोल जाम

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आसनसोल :  अपनी लंबित मांगों को लेकर 23 दिसंबर से आंदोलनरत आशा कर्मियों का गुस्सा मंगलवार को सड़कों पर फूट पड़ा। आशा कर्मियों ने आसनसोल नगर निगम मोड़ पर पथावरोध कर दिया, जिससे शहर की मुख्य जीवनरेखा मानी जाने वाली जीटी रोड और स्टेशन जाने वाली संपर्क सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सुबह से ही सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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मंगलवार को बड़ी संख्या में आशा कर्मियां नगर निगम मोड़ पर एकत्र हुईं और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर जाम लगाया और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान कुछ राहगीरों और वाहन चालकों ने रास्ता खाली कराने का प्रयास किया, जिस पर आशा कर्मियों और आम लोगों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। हालांकि, किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

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आशा कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से न्यूनतम वेतन और नियमित भुगतान की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि उन्हें कम से कम 15 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने नियमित रूप से वेतन न मिलने पर गहरा रोष जताया।

आंदोलनरत कर्मियों का आरोप है कि उनसे स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई तरह के कार्य कराए जाते हैं, लेकिन उसके अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता। टीकाकरण, सर्वे, जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिविरों से लेकर आपात स्थितियों तक में आशा कर्मियों की अहम भूमिका होती है, इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही सम्मानजनक वेतन। कई कर्मियों ने कहा कि बिना किसी भुगतान के अतिरिक्त कार्य कराना सरासर शोषण है।

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पथावरोध के कारण नगर निगम मोड़ और आसपास के इलाकों में घंटों जाम की स्थिति बनी रही। स्कूली बच्चे, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी और मरीजों को विशेष परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर मौजूद रही और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करती रही, लेकिन आशा कर्मियों ने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया।

प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई उनके हक और सम्मान की है, और इसे अंजाम तक पहुंचाकर ही वे सड़क से हटेंगी। मंगलवार का यह पथावरोध एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर गया कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कर्मियों की समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा।

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