आसनसोल : गुरुवार को कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इस कार्रवाई ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसके रणनीतिक सहयोगियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में बयानबाज़ी शुरू हो गई और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।

आसनसोल दक्षिण की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने गुरुवार को इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आई-पैक से जुड़े लोगों के ठिकानों पर ईडी की रेड यह दर्शाती है कि पर्दे के पीछे कुछ गंभीर गड़बड़ियां जरूर हुई हैं। लंबे समय से जिन संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, अब उन पर केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और आई-पैक के बीच सहयोग कोई नई बात नहीं है। चुनावी रणनीति से लेकर राजनीतिक प्रबंधन तक, दोनों के रिश्तों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब ईडी सक्रिय हुई है, तो यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मामले की परतें गहरी हैं और सच्चाई सामने आना जरूरी है।
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में लगातार भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। शिक्षक भर्ती, कोयला, राशन और अब राजनीतिक रणनीति से जुड़े संगठनों तक जांच का दायरा बढ़ना इस बात का संकेत है कि राज्य में अनियमितताओं की जड़ें काफी भीतर तक फैली हुई हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून अपना रास्ता खुद तय करता है और जांच एजेंसियां किसी दबाव में काम नहीं कर रही हैं।

गुरुवार को दिए गए अपने बयान में अग्निमित्रा पाल ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर डाली। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता सब कुछ देख और समझ रही है। समय आने पर जनता ही तय करेगी कि कौन सही है और कौन गलत। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने जवाब देना पड़ेगा।
ईडी की इस कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर बेचैनी साफ देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है तथा राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
गुरुवार को शुरू हुई इस जांच की गूंज केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम बंगाल की सियासत पर पड़ता दिख रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे राजनीतिक तापमान और चढ़ने की संभावना जताई जा रही है।















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