दुर्गापुर/आसनसोल : गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखी गर्माहट देखने को मिली, जब चुनाव रणनीतिकार संस्था आई-पैक के कार्यालय और उसके प्रमुख के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने राज्यभर में व्यापक प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आह्वान पर हुए इस विरोध ने पश्चिम बर्द्धमान जिले को भी पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। कई इलाकों में सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।

गुरुवार को दुर्गापुर के भिड़ंगी मोड़ पर तृणमूल समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को जाम कर दिया। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है। राजमार्ग जाम होने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य के मंत्री प्रदीप मजूमदार ने किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा राजनीतिक रूप से मुकाबला करने में असफल हो चुकी है, इसलिए अब ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आई-पैक के कार्यालयों पर छापेमारी के नाम पर जरूरी दस्तावेजों को जब्त कर डर का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से तृणमूल कांग्रेस डरने वाली नहीं है।
प्रदीप मजूमदार ने गुरुवार को अपने संबोधन में दावा किया कि बंगाल की जनता भाजपा की कथित तानाशाही नीतियों को भली-भांति समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता लोकतंत्र पर हो रहे इन हमलों का मुंहतोड़ जवाब देगी। उनका यह भी कहना था कि भाजपा चाहे जितने प्रयास कर ले, बंगाल की सत्ता तक उसकी पहुंच संभव नहीं है।

दुर्गापुर के अलावा आसनसोल, कुल्टी, रानीगंज और पांडवेश्वर समेत पश्चिम बर्द्धमान जिले के कई हिस्सों में तृणमूल कांग्रेस ने रैलियां निकालीं। विभिन्न वार्डों और ब्लॉकों में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार का पुतला दहन किया और एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया। जगह-जगह हुई इन रैलियों से जिले का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म नजर आया।
गुरुवार को हुए इन प्रदर्शनों के कारण कई इलाकों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। संभावित हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आई-पैक और ईडी कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। गुरुवार का राज्यव्यापी विरोध इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव अब और खुलकर सामने आने वाला है।















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