जेमुआ में आईएसएफ शक्ति प्रदर्शन, तीसरे विकल्प का राजनीतिक दावा

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दुर्गापुर :  पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर-फरीदपुर ब्लॉक अंतर्गत जेमुआ इलाके में शुक्रवार को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) की ओर से एक विशाल विरोध जुलूस निकाला गया, जिसने पूरे क्षेत्र का राजनीतिक माहौल गरमा दिया। हाथों में पार्टी का झंडा और जुबान पर संगठन के नारे लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों पर उतरे। जुलूस के दौरान अनुशासित कतारों में चल रहे समर्थकों ने अपनी मौजूदगी से यह संकेत देने की कोशिश की कि इलाके में आईएसएफ की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

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इस जुलूस को देखने के लिए सड़क किनारे स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई स्थानों पर लोगों ने रुककर जुलूस को देखा और नेताओं के भाषण सुने। इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल रहा, क्योंकि लंबे समय बाद किसी नए राजनीतिक दल की ओर से इस तरह का व्यापक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला।

जुलूस के समापन पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए आईएसएफ नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। नेताओं का कहना था कि राज्य की राजनीति में लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव चलता आ रहा है, लेकिन दोनों ही दल आम जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने में विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी असंतोष के कारण अब लोग एक नए और भरोसेमंद विकल्प की तलाश में हैं, और आईएसएफ उस खाली जगह को भरने के लिए आगे आई है।

आईएसएफ नेतृत्व ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि उनकी पार्टी धर्म, जाति और समुदाय की दीवारों से ऊपर उठकर राजनीति करना चाहती है। नेताओं ने कहा कि समाज के हर वर्ग—किसान, मजदूर, युवा और अल्पसंख्यक—आईएसएफ से जुड़ रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अधिकार और पारदर्शी शासन की स्थापना करना है।

सभा को संबोधित करते हुए आईएसएफ नेता शेख अजहर ने कहा कि वे पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में विधायक नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व में आईएसएफ से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि जेमुआ और आसपास के इलाकों में संगठन को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। उनके अनुसार, अब तक इस क्षेत्र में 500 से अधिक लोग औपचारिक रूप से आईएसएफ की सदस्यता ले चुके हैं, जो पार्टी के बढ़ते जनाधार का संकेत है।

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शेख अजहर ने कहा कि आईएसएफ केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं—रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं—को लेकर भी संघर्ष करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करें और पार्टी की विचारधारा को आम जनता तक पहुंचाएं।

जुलूस के दौरान आईएसएफ कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी की और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने का प्रयास किया। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी गई, हालांकि पूरे कार्यक्रम के दौरान कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्गापुर-फरीदपुर जैसे औद्योगिक और ग्रामीण मिश्रित क्षेत्रों में आईएसएफ का यह शक्ति प्रदर्शन आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, जेमुआ में निकाला गया यह जुलूस आईएसएफ की बढ़ती सक्रियता और तीसरे विकल्प के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

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