विवेकानंद जयंती पर रामकृष्ण मिशन की भव्य शोभायात्रा

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आसनसोल :  स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के पावन अवसर पर आसनसोल रामकृष्ण मिशन की ओर से नगर में भव्य और प्रेरणादायी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रीय गौरव और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। पूरे वातावरण में विवेकानंद के विचारों और आदर्शों की गूंज सुनाई दी।

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शोभायात्रा का नेतृत्व आसनसोल रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी सौमात्मानंद जी महाराज ने किया। उनके साथ आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, डिप्टी मेयर अभिजीत घटक, बोरो चेयरमैन अनिमेष दास, रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने स्वामी विवेकानंद के चित्रों और बैनरों के साथ यात्रा में भाग लेकर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

इस शोभायात्रा में शहर के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। अनुशासनबद्ध पंक्तियों में चलते विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचार और राष्ट्रप्रेम से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया। हाथों में विवेकानंद की आकर्षक तस्वीरें और प्रेरक उद्धरण लिए बच्चे विशेष रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे।

शोभायात्रा के समापन के बाद जुबली क्षेत्र में एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में राज्य के मंत्री मलय घटक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत के ऐसे महान संत और विचारक थे, जिन्होंने देश को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया। उन्होंने कहा कि शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में दिया गया विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण आज भी मानवता, सहिष्णुता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।

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मंत्री मलय घटक ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से न केवल भारत को आत्मविश्वास दिया, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानव कल्याण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विवेकानंद का मानना था कि भेदभाव से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता और सर्वधर्म समभाव ही सच्ची मानवता की पहचान है।

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अपने संबोधन में मंत्री ने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती केवल स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हम उनके आदर्शों को केवल भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण और समाजिक जीवन में उतारने का प्रयास करें।

सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन, युवा शक्ति पर उनके विश्वास और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाज में सद्भाव, समानता और सेवा की भावना को मजबूत करने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे, ताकि स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत साकार हो सके।

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