कुल्टी : कुल्टी थाना क्षेत्र के बोडरा इलाके में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बीसीसीएल की एक ओपन कास्ट खदान में अवैध रूप से कोयला निकालने के दौरान अचानक जमीन धंस गई। इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया। घटना में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे इलाके में दहशत और मातम का माहौल है।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुबह के समय कुछ लोग खदान के भीतर अवैध तरीके से कोयला निकाल रहे थे। इसी दौरान खदान की कमजोर दीवार और ऊपर जमी मिट्टी अचानक धंस गई। कुछ ही पलों में चारों ओर धूल का गुबार फैल गया और चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू करने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी।
चार निकाले गए, दो की मौत की आशंका
हादसे के बाद अब तक खदान से चार लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से दो की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो अन्य लोगों के मृत होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतकों में एक महिला भी शामिल है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान के भीतर अभी भी दो और लोग फंसे हो सकते हैं। इस आशंका के चलते बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। भारी मशीनों, विशेषकर पोकलेन मशीन की मदद से मिट्टी और मलबा हटाया जा रहा है ताकि दबे लोगों तक पहुंचा जा सके।
घटनास्थल पर भारी भीड़, सुरक्षा कड़ी
घटना की खबर फैलते ही बोडरा ओपन कास्ट माइंस के आसपास सैकड़ों लोग जमा हो गए। भीड़ में मृतकों और घायलों के परिजन भी शामिल थे, जिनका रो-रोकर बुरा हाल था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुल्टी थाना पुलिस के साथ-साथ सीआईएसएफ की बड़ी टुकड़ी को मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने क्षेत्र को घेरकर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी, ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।
अवैध खनन पर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद अवैध कोयला खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बोडरा और आसपास के इलाकों में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है। कमजोर सुरक्षा व्यवस्था और खदानों की जर्जर हालत के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर कोयला निकालने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं।
प्रशासनिक जांच के संकेत
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी हरकत में आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, हादसे की जांच के आदेश दिए जा सकते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध खनन किसकी मिलीभगत से हो रहा था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई। साथ ही, बीसीसीएल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।

पीड़ित परिवारों में मातम
हादसे के बाद से इलाके में शोक का माहौल है। जिन परिवारों के सदस्य खदान में फंसे हैं, वे हर पल किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। महिलाएं और बच्चे घटनास्थल के पास बदहवास हालत में नजर आए। लोगों का कहना है कि रोजी-रोटी की मजबूरी उन्हें इस खतरनाक काम की ओर धकेलती है, लेकिन इसका अंजाम इतना भयावह होगा, किसी ने नहीं सोचा था।
फिलहाल बचाव कार्य जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, दबे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज की जा रही हैं। यह हादसा न सिर्फ अवैध खनन की पोल खोलता है, बल्कि सुरक्षा और मानव जीवन की अनदेखी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।















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