चित्तरंजन : चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्लू) कारखाना परिसर में श्रमिक असंतोष खुलकर सामने आया। चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस (सीआरएमसी/एनएफआईआर/आईएनटीयूसी) के बैनर तले सैकड़ों श्रमिकों ने एकजुट होकर विरोध रैली निकाली और केंद्र सरकार व रेलवे प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। रैली के दौरान श्रमिकों ने पांच सूत्री मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

कारखाना परिसर से शुरू हुई यह रैली विभिन्न विभागों से होकर गुजरी, जिसमें हर वर्ग के कर्मचारियों की भागीदारी देखने को मिली। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए श्रमिक नई श्रम नीतियों, निजीकरण और पेंशन व्यवस्था में बदलाव के विरोध में एक सुर में आवाज उठा रहे थे। रैली के माध्यम से कर्मचारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के सवाल पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
नई श्रम नीतियों और निजीकरण पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों को तत्काल प्रभाव से रद्द करना शामिल है। श्रमिकों का कहना है कि ये कानून मजदूर हितों के खिलाफ हैं और इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा, कार्य के घंटे और सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे, विशेष रूप से सीएलडब्लू में बढ़ती निजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
श्रमिकों का आरोप है कि निजीकरण के नाम पर स्थायी नौकरियों को खत्म किया जा रहा है और ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे जैसी सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपना न केवल कर्मचारियों बल्कि देशहित के भी खिलाफ है।
पेंशन और वेतन आयोग का मुद्दा
रैली में नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को तत्काल लागू करने की मांग भी प्रमुख रही। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बेहद जरूरी है। इसके अलावा लंबे समय से लंबित 8वें वेतन आयोग की शीघ्र घोषणा की मांग करते हुए श्रमिकों ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन में उसके अनुरूप सुधार नहीं हो पा रहा है।

खाली पदों को भरने की मांग
सीएलडब्लू में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा भी रैली में गूंजता रहा। कर्मचारियों का कहना है कि पद रिक्त रहने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बिना देरी सभी रिक्त पदों को भरने की मांग की।
यूनियन का सख्त संदेश
आईएनटीयूसी के चित्तरंजन महासचिव इंद्रजीत सिंह ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन श्रमिकों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि नई श्रम नीतियों और निजीकरण के खिलाफ यह संघर्ष मजबूरी बन चुका है। यदि सरकार और प्रशासन ने श्रमिकों की मांगों को नजरअंदाज किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज तथा व्यापक होगा।
कुल मिलाकर, सीएलडब्लू परिसर में हुई यह रैली न केवल श्रमिकों के बढ़ते असंतोष को दर्शाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि श्रमिक अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होकर लंबा संघर्ष करने को तैयार हैं।















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