आसनसोल : बराकर अंतर्गत दामागोड़िया ओसीपी क्षेत्र में हुए हालिया भीषण हादसे ने पूरे कोयलांचल को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना अब केवल एक दुर्घटना भर नहीं रह गई है, बल्कि इसके साथ अवैध कोयला कारोबार, कथित सिंडिकेट और संभावित संरक्षण को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। हादसे के बाद जिस तरह से कुछ नाम और दावे सामने आ रहे हैं, उसने प्रशासनिक तंत्र और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर तेजी से उभरकर आया एक नाम—खुकू—अब इलाके की चर्चाओं के केंद्र में है। क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा आम है कि कथित तौर पर इसी नाम के इर्द-गिर्द लंबे समय से अवैध कोयला कारोबार का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। लोगों का दावा है कि यह नेटवर्क केवल दामागोड़िया ओसीपी तक सीमित नहीं, बल्कि सीमावर्ती झारखंड क्षेत्र से कोयला ढुलाई के अवैध संचालन में भी वर्षों से संलिप्त रहा है।
हादसे के बाद भी अवैध गतिविधियां जारी होने की चर्चाएं
हादसे के बाद आम धारणा यह थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा और अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगेगा। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास अब भी संदिग्ध हलचल देखी जा रही है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि अवैध कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, बल्कि अब यह और भी गोपनीय तरीके से संचालित किए जाने की आशंका है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
सोशल मीडिया से बढ़ी रहस्यात्मकता
इस पूरे प्रकरण में सोशल मीडिया ने भी आग में घी डालने का काम किया है। हादसे के बाद राजनीतिक हलकों में उस समय खलबली मच गई, जब सत्तारूढ़ दल से जुड़े एक कार्यकर्ता द्वारा एक पोस्ट साझा किए जाने की चर्चा हुई। बताया जाता है कि उस पोस्ट में कथित सिंडिकेट से जुड़े नामों के साथ-साथ एक पुलिस अधिकारी का भी उल्लेख था। लेकिन कुछ ही समय बाद वह पोस्ट अचानक डिलीट कर दी गई।
पोस्ट के हटते ही सवाल और गहरे हो गए—क्या किसी दबाव में ऐसा किया गया? या फिर पोस्ट में किए गए दावे तथ्यात्मक नहीं थे? इस रहस्यमय घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है।

क्षेत्र में गूंज रहे अनुत्तरित प्रश्न
हादसे के बाद अब कोयलांचल में कई सवाल खुलेआम पूछे जा रहे हैं—
आखिर कथित सिंडिकेट का संचालन कौन कर रहा है?
क्या अवैध कोयला ढुलाई किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के बिना संभव है?
झारखंड से बंगाल तक फैले इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका है?
और सबसे अहम, क्या हादसे से कोई सबक लिया गया या फिर सब कुछ पहले की तरह चलता रहेगा?
प्रशासन की चुप्पी पर उठती उंगलियां
इन तमाम चर्चाओं और आरोपों के बावजूद प्रशासन और पुलिस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट या ठोस बयान सामने नहीं आया है। न तो किसी कथित सरगना के नाम की पुष्टि हुई है और न ही अवैध कोयला सिंडिकेट के अस्तित्व को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई है। इस चुप्पी ने लोगों की शंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
जनता की अपेक्षा और आगे की राह
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस हादसे के बाद भी अवैध कोयला कारोबार पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। दामागोड़िया ओसीपी की घटना अब प्रशासन के लिए एक परीक्षा बन चुकी है—या तो वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों तक पहुंचे, या फिर यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दबकर रह जाए।
फिलहाल, पूरे क्षेत्र की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या हादसे के बाद उठे सवालों के जवाब मिलेंगे, या फिर अवैध कोयला कारोबार से जुड़ी परछाइयां यूं ही कोयलांचल पर मंडराती रहेंगी।















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