शादी का झांसा देकर शोषण, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा

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दुर्गापुर :  शनिवार को दुर्गापुर न्यायिक क्षेत्र से एक अहम और संवेदनशील मामले में कड़ा संदेश देने वाला फैसला सामने आया। पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल थाना अंतर्गत एक युवती के साथ शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और उसे गर्भवती करने के मामले में दुर्गापुर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश गिरिजानंद जाना ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि समाज की नैतिकता और महिला सम्मान के विरुद्ध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति महिलाओं की भावनाओं और भरोसे के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की मुलाकात वर्ष 2017 में एक पारिवारिक समारोह के दौरान बिहार के जमुई जिले के निवासी अमरेंद्र कुमार मंडल से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फोन पर नियमित संपर्क होने लगा। युवक ने युवती का विश्वास जीतकर उससे विवाह का वादा किया और इसी भरोसे के आधार पर वर्ष 2018 से शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया।

अदालत में यह भी सामने आया कि आरोपी युवती के घर पर परिजनों की अनुपस्थिति में जाता था और उसे आसनसोल के एक होटल में भी ले जाया करता था। इसी दौरान युवती गर्भवती हो गई। आरोप है कि जब उसने विवाह की बात दोहराई, तो युवक ने उसे नशीला पदार्थ देकर जबरन गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया। यह घटना पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात बनकर सामने आई।

मामला तब और गंभीर हो गया, जब युवती के पिता और चाचा आरोपी के घर पहुंचे और विवाह को लेकर बातचीत की। शुरुआत में युवक के परिजन विवाह के लिए तैयार हुए, लेकिन बाद में उन्होंने दहेज के रूप में 20 लाख रुपये नकद और अंडाल में एक मकान की मांग रख दी। इस मांग से युवती का परिवार स्तब्ध रह गया और अंततः वर्ष 2019 के अंत में अंडाल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। बाद में उसे जमानत मिल गई, लेकिन न्यायालय में सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके परिजन, एक चिकित्सक और अनुसंधान अधिकारी सहित कुल छह गवाहों ने अदालत में बयान दिए। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के दावों को मजबूत किया।

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सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद गुरुवार को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया, जबकि शुक्रवार को सजा का ऐलान किया गया। शनिवार को इस फैसले की व्यापक चर्चा रही। दुर्गापुर कोर्ट के लोक अभियोजक अफसरुल हक ने बताया कि अदालत ने आरोपी को यौन शोषण और गर्भपात के लिए मजबूर करने के मामलों में कठोरतम दंड दिया है।

इस फैसले के बाद महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न्यायालय की सराहना की है। उनका कहना है कि यह निर्णय उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो ऐसे अपराधों का शिकार होकर भी चुप रहने को मजबूर हो जाती हैं। अदालत का यह रुख समाज में एक स्पष्ट संदेश देता है कि झूठे विवाह वादों के सहारे शोषण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

शनिवार को आए इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया कि कानून की नजर में महिला सम्मान और सहमति सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार का छल, दबाव या शोषण गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

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