आसनसोल : सोमवार को आसनसोल में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा एक प्रशासनिक दिन अचानक राजनीतिक टकराव में बदल गया। एसडीओ कार्यालय के सामने फॉर्म-7 जमा करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थक आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का आलम रहा, जिससे कुछ समय के लिए प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार को फॉर्म-7 जमा करने की अंतिम तिथि होने के कारण सुबह से ही एसडीओ कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। इसी दौरान दोनों राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने आरोपों के साथ आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि धक्का-मुक्की और नारेबाजी शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान कई फॉर्म-7 को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
टीएमसी समर्थकों का दावा है कि भाजपा कार्यकर्ता जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे और अवैध तरीके से फॉर्म जमा कराने का दबाव बना रहे थे। वहीं भाजपा का आरोप है कि फॉर्म जमा करने के अंतिम दिन तृणमूल समर्थकों ने बलपूर्वक हस्तक्षेप किया और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया। दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं।
घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति के विरोध में भाजपा ने भगत सिंह मोड़ क्षेत्र में साउथ पुलिस पोस्ट कार्यालय के सामने सड़क जाम कर दिया। जाम के कारण इलाके में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि फॉर्म-7 जमा करने जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में इस तरह की कथित गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि फॉर्म जलाना सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करना नागरिकों के अधिकारों का हनन है और यह प्रशासनिक विफलता को भी उजागर करता है। पार्टी की ओर से मांग की गई कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है। उनका कहना था कि फॉर्म-7 को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है, ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के जरिए माहौल खराब कर प्रशासन पर दबाव बनाना चाहती है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त बल तैनात कर भीड़ को हटाने और सड़क जाम समाप्त कराने की कोशिश की गई। कई दौर की बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों को शांत कराया गया और धीरे-धीरे यातायात बहाल हुआ। हालांकि, पूरे घटनाक्रम ने शहर में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया।
सोमवार को हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे अब केवल प्रशासनिक नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सीधे राजनीतिक संघर्ष का मैदान बनते जा रहे हैं। फॉर्म-7 को लेकर हुआ यह टकराव आने वाले दिनों में और सियासी बयानबाजी को जन्म दे सकता है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।















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