रानीगंज : मंगलवार को रानीगंज रेलवे ग्राउंड धर्म, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का साक्षी बना, जब यहां ‘रानीगंज हिंदू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। “धर्मो रक्षति रक्षितः” के सूत्र वाक्य को केंद्र में रखकर आयोजित इस सम्मेलन ने न केवल धार्मिक वातावरण रचा, बल्कि हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान और वैचारिक चेतना को भी मजबूती प्रदान की।

इस विराट धार्मिक समागम में भारत सेवाश्रम संघ, बेलडांगा के अध्यक्ष स्वामी प्रदीप्तानंद जी महाराज, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से कार्तिक महाराज के नाम से जानते हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन से पूरे सम्मेलन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। श्रद्धालुओं ने जयघोष और शंखनाद के साथ उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके पश्चात सामूहिक ‘गीता पाठ’ सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहा। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ भगवद्गीता के श्लोकों का सस्वर पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित यज्ञ, कीर्तन और भजन संध्या ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
सम्मेलन में धर्मसभा का भी आयोजन किया गया, जहां वक्ताओं ने हिंदू समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार रखे। शिक्षा, संस्कृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और युवाओं में नैतिक मूल्यों के विकास जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदू संस्कृति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जिसमें करुणा, सहिष्णुता और कर्तव्यबोध निहित है।

अपने संबोधन में स्वामी प्रदीप्तानंद जी महाराज ने कहा कि धर्म की रक्षा करने से ही समाज और राष्ट्र की रक्षा संभव है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानें और आधुनिक जीवन में भी धर्म, संयम और सदाचार को स्थान दें। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता में निहित है और संगठित रहकर ही समाज आगे बढ़ सकता है।
सम्मेलन के दौरान प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता और सुव्यवस्था विशेष रूप से देखने को मिली, जिसकी स्थानीय लोगों ने सराहना की।

रानीगंज हिंदू सम्मेलन न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का मंच भी बना। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है। सम्मेलन के समापन पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ समाज की एकता और राष्ट्रहित का संकल्प दोहराया गया।















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