आसनसोल : औद्योगिक नगरी आसनसोल में शुक्रवार को परंपरा, कला और संस्कृति की रंगीन झलक देखने को मिली, जब इंडिया पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के तत्वावधान में इंडिया पावर कारीगरी मेले का शुभारंभ किया गया। यह मेला सृष्टि नगर स्थित सेंट्रम मॉल के सामने खुले मैदान में आयोजित किया गया है, जहां 23 से 26 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से कला प्रेमियों और आम लोगों के लिए इसके द्वार खुले रहेंगे।

गणमान्य अतिथियों ने किया उद्घाटन : शुक्रवार को मेले का उद्घाटन श्रम एवं ईएसआई (एमबी) योजना विभाग तथा कानून और न्यायिक मामलों के प्रभारी मंत्री मलय घटक ने किया। इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन, आसनसोल के सचिव स्वामी सोमात्मानंद महाराज और रामकृष्ण मिशन, दिल्ली से पधारे स्वामी त्यागभयानंद महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।इसके अलावा आसनसोल नगर निगम की पार्षद श्रावणी मंडल, अनिर्बान दास, विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि तथा इंडिया पावर के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
हस्तशिल्प की विविधता ने खींचा ध्यान : कारीगरी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगरों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित वस्तुओं की समृद्ध श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। आगंतुकों को यहां डोकरा, पटाचित्र, टेराकोटा, कांथा, मदुर, जामदानी, जूट और बेंत से बने उत्पाद देखने को मिल रहे हैं।इसके अलावा चमड़े के सामान, पारंपरिक मसाले, हस्तनिर्मित आभूषण और विभिन्न प्रकार के वस्त्र भी मेले का आकर्षण हैं। कांथा, मलमल, चिकनकारी, अजराख, बाटिक जैसी पारंपरिक हथकरघा तकनीकों से बने परिधान लोगों को खासा पसंद आ रहे हैं।
45 स्टॉल, हर स्टॉल में अनोखी पहचान : मेले में कुल 45 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां हर स्टॉल पर हाथ से बनी वस्तुओं का अनूठा संग्रह प्रस्तुत किया गया है। कारीगरों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से उन्हें न केवल अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मंच मिलता है, बल्कि सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजेगी हर शाम : मेले की रौनक को और बढ़ाने के लिए हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। बाउल गीत, पल्ली गीति और बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएसआर से आगे की पहल : इंडिया पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक सोमेश दासगुप्ता ने कहा कि इंडिया पावर कारीगरी मेला केवल एक कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व की पहल नहीं है, बल्कि यह कारीगरों को सशक्त बनाने और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने का प्रयास है।उन्होंने उन कारीगरों और सरकारी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने वर्षों से इस आयोजन पर भरोसा बनाए रखा है।
कला और रोजगार का संगम : शुक्रवार को शुरू हुए इस कारीगरी मेले ने आसनसोल में कला, संस्कृति और रोजगार के अवसरों का एक सशक्त मंच प्रस्तुत किया है। आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचकर भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा से रूबरू होंगे।















Users Today : 22
Users Yesterday : 23