आसनसोल : गुरुवार को आसनसोल नगर निगम परिसर उस समय तनाव का केंद्र बन गया, जब निगम के अधीन कार्यरत झाड़ू-सफाई कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी निगम कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए, जिससे प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ा। कर्मियों के अचानक आंदोलन पर उतरने से निगम परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याएं लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय ने उनसे बातचीत करने और समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय पर वे उपस्थित नहीं हुए। इससे पहले से नाराज कर्मचारियों का गुस्सा और भड़क उठा। कर्मचारियों ने इसे अपमानजनक रवैया बताते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
गुरुवार को धरने के दौरान सफाई कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनकी सबसे बड़ी मांग वेतन वृद्धि से जुड़ी है। वर्तमान में उन्हें मात्र 9,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जो महंगाई के इस दौर में बेहद अपर्याप्त है। कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी। इसके साथ ही भविष्य निधि (पीएफ) की राशि नियमित रूप से जमा करने, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।
कर्मचारियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था शहर की रीढ़ है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मान मिलता है और न ही मूलभूत सुविधाएं। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पीएफ कटौती तो होती है, लेकिन राशि समय पर खाते में जमा नहीं की जाती। इससे उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। बार-बार ज्ञापन देने और मौखिक आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से वे आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है, तो सड़कों और मोहल्लों में कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई कर्मियों की मांगें जायज हैं और नगर निगम को जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
गुरुवार को खबर लिखे जाने तक सफाई कर्मियों का धरना निगम परिसर में जारी रहा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। इसमें काम बंद करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है और उच्च स्तर पर इस पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहते हैं।
गुरुवार का यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि यदि समय रहते संवाद और समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर न केवल निगम प्रशासन पर, बल्कि पूरे शहर की व्यवस्था पर पड़ सकता है।














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