आसनसोल : शनिवार को आसनसोल में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा। कई इलाकों में सड़कों के किनारे, अस्पतालों के सामने और स्कूल परिसरों के आसपास कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। जगह-जगह फैली गंदगी से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और शहर के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।
स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि आगामी 2 फरवरी से माध्यमिक परीक्षा शुरू होने जा रही है। परीक्षा के दौरान छात्रों को स्कूलों तक पहुंचने में साफ-सुथरे रास्ते और स्वच्छ वातावरण की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा हालात में गंदगी छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख त्योहार भी नजदीक है। त्योहार से पहले शहर में सफाई और स्वच्छता की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन हड़ताल के चलते हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर आसनसोल नगर निगम में विरोधी दल की नेता और भाजपा पार्षद चैताली तिवारी ने निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि निगम को राजनीति से ऊपर उठकर तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
चैताली तिवारी ने सवाल उठाया कि नगर निगम शहरवासियों से टैक्स के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये वसूल करता है, फिर भी बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी बदहाल क्यों है। उन्होंने कहा कि जब लोग नियमित रूप से टैक्स दे रहे हैं, तो बदले में उन्हें साफ और स्वस्थ वातावरण मिलना उनका अधिकार है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से यह साफ हो गया है कि निगम की व्यवस्था पूरी तरह कर्मचारियों के भरोसे है, लेकिन वही कर्मचारी आज खुद उपेक्षा का शिकार हैं।
भाजपा पार्षद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। गंदगी के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है, जिसका असर खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ सकता है। उन्होंने निगम प्रशासन से अपील की कि वह तुरंत सफाई कर्मचारियों से बातचीत करे, उनकी जायज मांगों को माने और हड़ताल खत्म कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। अस्पतालों के आसपास कचरा जमा होने से मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, स्कूलों के पास गंदगी से छात्रों की सेहत पर खतरा बढ़ गया है। कई नागरिकों ने यह भी कहा कि त्योहार और परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण समय में निगम को और ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी चाहिए थी।
फिलहाल, शहरवासी नगर निगम से जल्द कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोगों की मांग है कि निगम प्रशासन और सफाई कर्मचारी आपसी बातचीत से समाधान निकालें, ताकि शहर फिर से साफ-सुथरा और स्वस्थ बन सके। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।

















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