आसनसोल : रविवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर देशभर में गहन चर्चा हो रही है। बजट के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं को समझने के लिए आसनसोल के प्रख्यात वित्त मामलों के विशेषज्ञ रितेश जलन से बातचीत की गई। उन्होंने इस बजट को भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूती देने वाला दस्तावेज बताया, जिसमें आर्थिक सुधार और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन साधने का प्रयास साफ दिखाई देता है।
रितेश जलन के अनुसार, इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को एक बार फिर केंद्र में रखा गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा और शहरी सुविधाओं पर निवेश बढ़ाने से न केवल निर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी, बल्कि इससे जुड़े अनेक उद्योगों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है और सरकार ने इस दिशा में निरंतरता बनाए रखी है।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए किए गए प्रावधानों पर भी उन्होंने संतोष जताया। ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की सोच को आगे बढ़ाते हुए इस बजट में उत्पादन, तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। रितेश जलन का मानना है कि इससे भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।
एमएसएमई सेक्टर को लेकर बजट में की गई घोषणाओं को उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया। छोटे और मध्यम उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें आसान कर्ज, बेहतर क्रेडिट सपोर्ट तथा सरल नियमों की आवश्यकता होती है। बजट में एमएसएमई के लिए समर्थन बढ़ाने से स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और रोजगार सृजन को नया आधार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सर्विस सेक्टर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, उसे भी इस बजट में नजरअंदाज नहीं किया गया। आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार और निवेश से देश की आर्थिक विविधता और मजबूती बढ़ेगी। इसके साथ ही कौशल विकास पर विशेष ध्यान देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास किया गया है।
रितेश जलन के अनुसार, टैक्स और कंप्लायंस को सरल बनाने की दिशा में उठाए गए कदम इस बजट की बड़ी विशेषता हैं। इससे कारोबार करना आसान होगा और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को वास्तविक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब नियम सरल और पारदर्शी होते हैं, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक माहौल बनता है।
वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करने के उपायों पर भी उन्होंने विस्तार से बात की। बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बाजार से जुड़े सुधारों का उद्देश्य पूंजी के बेहतर प्रवाह और स्थिरता को सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम ही विकास की निरंतरता को बनाए रख सकता है।
निवेशकों को संदेश देते हुए रितेश जलन ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि बजट हर साल आता है, लेकिन संपत्ति निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। यह केवल बजट घोषणाओं पर निर्भर नहीं करता, बल्कि अनुशासित निवेश, सही एसेट एलोकेशन और लक्ष्य आधारित वित्तीय योजना से संभव होता है। उन्होंने निवेशकों को अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित न होने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का है। दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप निवेश को संतुलित करना अधिक महत्वपूर्ण है, बजाय इसके कि बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया पर फैसले लिए जाएं। यह बजट स्थिरता, सुधार और भविष्य की तैयारी का संकेत देता है।
कुल मिलाकर, रितेश जलन के अनुसार केंद्रीय बजट 2026–27 केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक सोच, सुधारों की दिशा और दीर्घकालिक विकास के विजन को दर्शाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, कौशल और निवेश के संतुलन के साथ यह बजट आने वाले वर्षों के लिए मजबूत आधार तैयार करता नजर आता है।

















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