आसनसोल/कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में राज्य का अब तक का सबसे बड़ा अंतरिम बजट प्रस्तुत कर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। लगभग चार लाख छह हजार करोड़ रुपये के इस विशाल बजट को केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार की मंशा और प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। बजट भाषण के दौरान एक ओर जहां राज्य की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने का दावा किया गया, वहीं दूसरी ओर विभिन्न वर्गों को साधने वाली घोषणाओं ने इसे पूरी तरह चुनावी रंग दे दिया।

इस अंतरिम बजट की सबसे चर्चित घोषणा सिविक वॉलंटियर्स और ग्रीन पुलिस कर्मियों से जुड़ी रही। राज्य सरकार ने इन कर्मियों के मासिक मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में इन कर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना आवश्यक है। इस वेतन वृद्धि को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने लगभग 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इससे हजारों सिविक वॉलंटियर्स और ग्रीन पुलिस कर्मियों को सीधा लाभ मिलने की बात कही जा रही है।
वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उन कर्मियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है जो सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सरकार के अनुसार, बढ़े हुए मानदेय से इन कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
बजट में युवाओं को लेकर की गई घोषणा ने भी खासा ध्यान खींचा। राज्य सरकार ने शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए ‘बंगाल युवा साथी’ नामक एक नई योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के माध्यमिक उत्तीर्ण युवक-युवतियों को प्रतिमाह 1,500 रुपये का भत्ता दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे बेरोजगार युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा और वे स्वरोजगार अथवा भविष्य की योजनाओं के लिए स्वयं को तैयार कर सकेंगे।

हालांकि, इस योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण शर्त भी सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘बंगाल युवा साथी’ योजना 15 अगस्त से तभी लागू होगी, जब वर्तमान सरकार पुनः सत्ता में लौटेगी। इस शर्त को लेकर विपक्ष ने इसे खुला चुनावी वादा करार दिया है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह योजना सरकार की दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतरिम बजट पूरी तरह से चुनावी रणनीति के अनुरूप तैयार किया गया है। सिविक वॉलंटियर्स, सुरक्षा कर्मी और बेरोजगार युवा—ये तीन ऐसे वर्ग हैं जिनकी संख्या बड़ी है और जिनका सीधा प्रभाव चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। ऐसे में इन वर्गों को साधने की कोशिश को सरकार का सोचा-समझा कदम माना जा रहा है।
विपक्षी दलों ने बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार वास्तविक रोजगार सृजन के बजाय भत्तों और घोषणाओं के जरिए युवाओं को भ्रमित करना चाहती है। उनका आरोप है कि राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर है और ऐसे में इतनी बड़ी घोषणाएं भविष्य में वित्तीय बोझ बढ़ा सकती हैं।
इसके बावजूद, आम जनता के एक बड़े वर्ग में बजट को लेकर उत्सुकता और उम्मीद देखी जा रही है। खासकर सिविक वॉलंटियर्स और बेरोजगार युवाओं के बीच यह बजट चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कुल मिलाकर, अंतरिम बजट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी वर्ष में सरकार आर्थिक नीतियों से अधिक सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने पर जोर दे रही है।















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