आसनसोल : शुक्रवार को आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 13 स्थित रायपाड़ा इलाके से सामने आई तस्वीरें किसी असाधारण संकट की ओर इशारा कर रही हैं। यहां की गलियों और घरों में पुरुषों की मौजूदगी लगभग समाप्त हो चुकी है। मोहल्ले में केवल महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ही दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका के चलते अधिकांश पुरुष घर छोड़कर बाहर चले गए हैं। इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में भय, असमंजस और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

राजनीतिक टकराव से उपजा “कंबल विवाद”
रायपाड़ा और आसपास के इलाकों में उपजा यह संकट अचानक नहीं है। इसकी जड़ें उस कंबल वितरण कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही हैं, जिसने अब राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है। स्थानीय महिलाओं के अनुसार, चुनावी मौसम और ठंड के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों और समाजसेवियों द्वारा जरूरतमंदों को कंबल और कपड़े बांटे जाते रहे हैं। इसी कड़ी में कल्ला मोड़ निवासी समाजसेवी एवं भाजपा नेता कृष्णा प्रसाद अपने समर्थकों के साथ सालाडांगा इलाके में कंबल वितरण के लिए पहुंचे थे।
कार्यक्रम के दौरान रायपाड़ा और छूता डांगा क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के लोग भी कंबल लेने वहां पहुंचे। शुरुआत में माहौल सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और कार्यक्रम का विरोध शुरू कर दिया। “गो बैक” जैसे नारे लगाए गए, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ते देख कृष्णा प्रसाद वहां से निकल गए, जबकि उनके समर्थकों ने बचे हुए कंबल जरूरतमंदों में बांट दिए।
आरोपों से बदला घटनाक्रम का रुख
कंबल वितरण के बाद मामला तब और गंभीर हो गया, जब सालाडांगा से सटे एक गांव की महिला ने भाजपा नेता कृष्णा प्रसाद और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना है कि वितरण कार्यक्रम के दौरान उसके साथ छेड़खानी की गई और उसकी जमीन पर अवैध कब्जा भी किया गया है। इन आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
महिला की शिकायत के बाद तृणमूल नेता श्याम सोरेन के नेतृत्व में आदिवासी समाज के लोगों ने आसनसोल नॉर्थ थाना का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए पुलिस पर दबाव बनाया। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी शुरू की।
गिरफ्तारी के बाद पुरुषों का पलायन
पुलिस कार्रवाई के दौरान रायपाड़ा निवासी पुष्पराज दास की गिरफ्तारी की गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी गिरफ्तारी के बाद इलाके में डर का माहौल और गहरा हो गया। पुरुषों को आशंका हुई कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जिसके चलते उन्होंने घर छोड़ना शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना है कि शुक्रवार तक स्थिति यह हो गई कि मोहल्ले में एक भी पुरुष दिखाई नहीं दे रहा है।
इस पलायन का सीधा असर घर-परिवार और दैनिक जीवन पर पड़ा है। महिलाएं बच्चों की देखभाल, घर का खर्च और सुरक्षा—तीनों की जिम्मेदारी अकेले संभालने को मजबूर हैं। कई महिलाओं ने आशंका जताई कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो बच्चों की पढ़ाई छूट सकती है और परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

आदिवासी समाज में मतभेद
“कंबल कांड” ने आदिवासी समाज को भी दो गुटों में बांट दिया है। एक वर्ग महिला के आरोपों को सही मानते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि महिलाओं की गरिमा और जमीन के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं दूसरा वर्ग इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक साजिश बता रहा है। उनका आरोप है कि विरोधी दलों की आपसी राजनीति में निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है और झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
पुराने विवाद की यादें ताजा
इस घटनाक्रम ने क्षेत्र के लोगों को पुराने कंबल विवाद की भी याद दिला दी है। कुछ वर्ष पहले रामकिशन डंगाल इलाके में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें तीन महिलाओं की मौत हो गई थी। उस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता जितेंद्र तिवारी सहित कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था और गिरफ्तारियां भी हुई थीं। हालांकि वर्तमान मामले में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन छेड़खानी और जमीन कब्जे जैसे आरोपों ने इसे भी गंभीर बना दिया है।
भाजपा की प्रतिक्रिया, आंदोलन की चेतावनी
शुक्रवार को भाजपा के राज्य स्तरीय नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दुर्भावना के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि झूठे मामलों को वापस नहीं लिया गया तो पार्टी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को बाध्य होगी।
प्रशासन की भूमिका और आगे की राह
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
फिलहाल, रायपाड़ा की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं—क्या राजनीति की लड़ाई में आम लोग पिस रहे हैं? क्या भय के साये में पुरुषों का पलायन किसी बड़े सामाजिक संकट का संकेत है? और क्या प्रशासन समय रहते हालात को संभाल पाएगा? शुक्रवार को उठा यह “कंबल विवाद” अब केवल एक घटना नहीं, बल्कि आसनसोल की राजनीति और समाज के सामने खड़ा एक बड़ा प्रश्न बन चुका है।















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