आसनसोल : शनिवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब भाजपा के वरिष्ठ नेता जितेन्द्र तिवारी ने एक वीडियो संदेश जारी कर राज्य की महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता से जुड़ी बड़ी घोषणा का जिक्र किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस संदेश में उन्होंने दावा किया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो आगामी 1 जून 2026 से महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह तीन हजार रुपये की राशि भेजी जाएगी।

वीडियो संदेश में तिवारी ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा सरकारों ने महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की योजनाएं चलाई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में चुनावों के पहले और बाद में आर्थिक मदद की घोषणाएं की गईं और महिलाओं को सीधे लाभ मिला। इसी तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी नई पहल की तैयारी की जा रही है।
भाजपा नेता ने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित योजना के तहत माताओं और बहनों को नियमित आर्थिक सहयोग मिलेगा, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि यह सहायता किसी अन्य लाभ या अवसर में बाधा नहीं बनेगी। युवाओं के लिए रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं भी समानांतर रूप से लागू की जाएंगी।
तिवारी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, सड़कों की स्थिति सुधारने और आवास योजनाओं को तेज करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंद परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा जाएगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों में बेहतर उपचार मिल सके।
भाजपा नेता ने दावा किया कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ राज्य के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी और पात्र परिवारों को ऊंची चिकित्सा लागत की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
वीडियो संदेश के प्रसारित होते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। समर्थकों ने इसे महिलाओं के हित में बड़ा कदम बताते हुए स्वागत किया, वहीं विरोधी दलों ने इसे चुनावी वादा करार दिया। हालांकि भाजपा की ओर से कहा गया कि पार्टी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता देने का मुद्दा आगामी चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। राज्य में पहले से चल रही विभिन्न सामाजिक योजनाओं के बीच इस तरह की घोषणा से मतदाताओं का ध्यान आकर्षित होना स्वाभाविक है।
शनिवार को जारी इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि चुनावी मुकाबले से पहले राजनीतिक दल जनता के अलग-अलग वर्गों को साधने की कवायद में जुट गए हैं। विशेष रूप से महिला मतदाताओं को लेकर सभी दल अपनी-अपनी योजनाओं और दृष्टिकोण को सामने ला रहे हैं।
फिलहाल भाजपा की ओर से किए गए इस वादे ने बहस को नई दिशा दे दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राजनीतिक दल इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और चुनावी माहौल में यह मुद्दा किस तरह आकार लेता है। इतना तय है कि महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण अब राज्य की राजनीति के केंद्र में आ चुका है।















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