रानीगंज : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी प्रकरण में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में दो प्रभावशाली व्यवसायियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे कोयला तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चिन्मय मंडल और किरण खां के रूप में हुई है, जो आपस में रिश्ते में मामा-भांजे बताए जा रहे हैं।

ईडी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चिन्मय मंडल दुर्गापुर क्षेत्र का निवासी है, जबकि किरण खां रानीगंज के बख्तार नगर इलाके का रहने वाला है। दोनों का नाम लंबे समय से आसनसोल-रानीगंज कोयला बेल्ट में अवैध कोयला कारोबार से जोड़ा जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर इनकी पहचान प्रभावशाली व्यवसायियों के रूप में रही है और इनका नेटवर्क दूर-दूर तक फैला हुआ बताया जाता है।
मंगलवार को ईडी अधिकारियों ने बताया कि कोयला तस्करी और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले की जांच के सिलसिले में दोनों को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में तलब किया गया था। यहां उनसे घंटों तक गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान जब दोनों आरोपी जांच अधिकारियों के सवालों के स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके तथा सहयोग से बचते नजर आए, तो ईडी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें गिरफ्तार करने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि फरवरी माह की शुरुआत से ही प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में आक्रामक कार्रवाई कर रही है। बीते 3 फरवरी को ईडी ने केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों के साथ मिलकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ छापेमारी की थी। उस दिन कोलकाता, दुर्गापुर, रानीगंज, जामुड़िया समेत लगभग 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। यह छापेमारी कोयला तस्करी, अवैध खनन और उससे अर्जित काले धन के नेटवर्क को उजागर करने के उद्देश्य से की गई थी।
इसी अभियान के तहत बुदबुद थाने के तत्कालीन प्रभारी मनोरंजन मंडल के दुर्गापुर स्थित आवास पर भी ईडी ने दस्तक दी थी। वहां घंटों तक दस्तावेजों की जांच की गई और उनसे पूछताछ भी की गई थी। इसके अलावा जामुड़िया क्षेत्र में एक बड़े व्यवसायी बंसल के घर पर भी छापेमारी हुई थी, जहां से नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की चर्चा रही।
मंगलवार को हुई ताजा गिरफ्तारी के बाद कोयला तस्करी से जुड़े अन्य लोगों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े पूरे वित्तीय लेन-देन की परतें खोलने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि अवैध कोयला और बालू तस्करी से अर्जित धन को किन-किन माध्यमों से खपाया गया और इसमें कौन-कौन से रसूखदार लोग शामिल हैं।

ईडी अधिकारियों का मानना है कि चिन्मय मंडल और किरण खां की गिरफ्तारी से इस घोटाले की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं। दोनों से पूछताछ के दौरान तस्करी के मार्ग, अवैध खनन के ठिकाने, स्थानीय स्तर पर संरक्षण देने वाले लोगों और धन के प्रवाह से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ईडी की नजर उन लोगों पर भी है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस अवैध कारोबार को संरक्षण दिया। मंगलवार को की गई इस कार्रवाई को कोयला तस्करी के खिलाफ चल रही जांच में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, ईडी की इस सख्त कार्रवाई से यह साफ संकेत मिला है कि केंद्रीय जांच एजेंसी कोयला तस्करी और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है। मंगलवार को हुई यह गिरफ्तारी न केवल जांच को नई दिशा देगी, बल्कि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी कड़ा संदेश मानी जा रही है।















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