आसनसोल : शहर में सामाजिक सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की गई। रोटरी क्लब ऑफ आसनसोल ग्रेटर डिस्ट्रिक्ट 3240 की ओर से 20 से 22 मार्च तक निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर एसबी गोरई रोड स्थित पार्वती हॉल में लगाया जाएगा, जहां जरूरतमंद दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ और पैर उपलब्ध कराए जाएंगे।

आयोजकों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को सहारा देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों की टीम मौजूद रहेगी, जो पहले पंजीकरण कराने वाले लाभार्थियों की जांच करेगी और उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग उपलब्ध कराएगी।
शिविर के संबंध में दी गई जानकारी के अनुसार, ऐसे लोग जिनका हाथ कोहनी से कुछ इंच तक सुरक्षित है लेकिन आगे का हिस्सा कटा हुआ है, वे कृत्रिम हाथ के लिए पात्र होंगे। इसी प्रकार जिनके पैर नहीं हैं, उन्हें कृत्रिम पैर प्रदान किए जाएंगे। लाभ लेने के लिए न्यूनतम आयु 10 वर्ष निर्धारित की गई है, ताकि अंग प्रत्यारोपण के बाद उसका सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
रोटरी क्लब के अध्यक्ष सचिन राय ने बताया कि संस्था लंबे समय से समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर संसाधनों की कमी के कारण सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होती है। ऐसे में यह शिविर उनके लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। उनका मानना है कि कृत्रिम अंग मिलने से कई लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे और रोजगार या शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ पाएंगे।

इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। रोटरी कम्युनिटी आसनसोल, ग्राम सब पेयेछिर आसर, इंटरेक्ट क्लब ऑफ आसनसोल, नार्थ पॉइंट स्कूल तथा रोटरेक्ट क्लब ऑफ पार्वती टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की भागीदारी उल्लेखनीय है। इन संस्थाओं के स्वयंसेवक पंजीकरण, मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं में मदद करेंगे।
आयोजकों ने जरूरतमंद लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण करा लें, ताकि शिविर के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर फोन कर विस्तृत जानकारी ली जा सकती है। बताया गया है कि पंजीकरण के बाद लाभार्थियों को निर्धारित तिथि और समय की सूचना दी जाएगी।
शहर के सामाजिक संगठनों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे प्रयास न केवल दिव्यांगजनों को नई दिशा देते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।















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