सर्पी शिवालय में उमड़ी आस्था, तिवारी ने की पूजा

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आसनसोल : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को सर्पी कोलियरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा इलाका गुंजायमान रहा। भक्त जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे थे।

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इस दौरान राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियां भी मंदिर पहुंचीं। भाजपा के वरिष्ठ नेता जितेंद्र तिवारी ने भी शिवलिंग पर विधि-विधान से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक भी मौजूद थे। तिवारी ने पूजा के बाद क्षेत्रवासियों की खुशहाली और राज्य में शांति की प्रार्थना की।

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मंदिर समिति ने महाशिवरात्रि को लेकर विशेष तैयारियां की थीं। परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग बनाए गए, ताकि भीड़ के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी रहे। स्वयंसेवक लगातार लोगों का मार्गदर्शन करते नजर आए।

भोर से शुरू हुआ पूजन का क्रम दिन चढ़ने के साथ और तेज हो गया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में खास उत्साह दिखाई दिया। कई श्रद्धालु व्रत रखकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर के पुजारियों द्वारा रुद्राभिषेक और विशेष मंत्रोच्चार किए गए, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।

नेता के आगमन को लेकर सुरक्षा की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी। हालांकि कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक रहा और आम श्रद्धालुओं की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगी। लोग सहज रूप से दर्शन करते रहे।

पूजा के बाद जितेंद्र तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि भारतीय संस्कृति में आस्था, संयम और ऊर्जा का प्रतीक है। भगवान शिव सबके कष्ट दूर करें और समाज में भाईचारा बना रहे, यही कामना है। उन्होंने युवाओं से भी सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि सर्पी कोलियरी का यह शिव मंदिर वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। हर साल महाशिवरात्रि पर यहां मेला जैसा माहौल बन जाता है। दूर-दराज से भी भक्त पहुंचते हैं और पूरी रात भजन-कीर्तन का दौर चलता है।

रविवार को भी देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय लोगों का सहयोग सराहनीय रहा।

भक्ति, उत्साह और अनुशासन के बीच मनाई गई महाशिवरात्रि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि क्षेत्र में धार्मिक परंपराएं कितनी गहरी जड़ें रखती हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर लौटे और अगले वर्ष फिर इसी आस्था के साथ आने का संकल्प दोहराते नजर आए।

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