एसआईआर पर उठे सवाल, राष्ट्रपति शासन की मांग तेज

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आसनसोल : आसनसोल में सोमवार को चुनावी सरगर्मियां उस समय और तेज हो गईं जब जगन्नाथ सरकार ने शीतला क्षेत्र स्थित भाजपा जिला कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन कर राज्य में चल रही विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। उनके साथ मंच पर जिला भाजपा अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य भी मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव की संभावित तारीखों की घोषणा से पहले हुई इस प्रेस वार्ता को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

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सांसद ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से होना चाहिए, किंतु वर्तमान हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप था कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ अधिकारी जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया विवादों में घिर जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया जाता, तब तक स्वतंत्र वातावरण में सही तरीके से एसआईआर पूरा होना मुश्किल है।

उन्होंने हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा सात अधिकारियों को निलंबित किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आवश्यक कदम बताया। साथ ही यह भी जोड़ा कि यह कार्रवाई हिमशैल का केवल ऊपरी हिस्सा है और आने वाले दिनों में कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। उनके मुताबिक जिन अधिकारियों पर संदेह है, उनमें ईआरओ, एईआरओ से लेकर जिला प्रशासन के वरिष्ठ पदाधिकारी तक शामिल हैं।

सांसद ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर ऐसे लोगों के आवेदन स्वीकार कर रहे हैं, जिनकी पात्रता पर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने कहा कि कथित रूप से अवैध दस्तावेजों के आधार पर नाम जोड़ने की कोशिशें हो रही हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो आगे चलकर चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठेंगे।

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भाजपा नेता ने दोहराया कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता स्पष्ट है—कोई भी वैध मतदाता सूची से वंचित न रहे, लेकिन किसी भी विदेशी, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित व्यक्ति का नाम भी दर्ज न हो। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि राज्य के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। पार्टी इस संबंध में लगातार चुनाव आयोग से संपर्क में है और आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध कराने को भी तैयार है।

पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन निष्पक्षता बरतता तो ऐसी मांग उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। लेकिन मौजूदा परिस्थितियां अलग संकेत दे रही हैं। इसलिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं, ताकि मतदाता सूची शुद्ध और विश्वसनीय बन सके।

सभा के अंत में जिला नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बूथ स्तर पर सजग रहें, लोगों को सही जानकारी दें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत पार्टी को उपलब्ध कराएं। प्रेस वार्ता के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। चुनाव नजदीक आते ही मतदाता सूची को लेकर आरोप–प्रत्यारोप का दौर और तीखा होने के संकेत मिल रहे हैं।

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