
आसनसोल : आसनसोल में सोमवार को श्रद्धा, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री श्री जागृति मां काली मंदिर, पद्दो तालाब के 14वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और ‘जय मां काली’ के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
निर्धारित समय पर विधि-विधान से पूजा के बाद कलश यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा मंदिर से निकलकर राहा लेन, जीटी रोड, हटन रोड और एनएस रोड होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागत किया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जलपान की व्यवस्था भी की, जिससे धार्मिक उत्सव में सहभागिता का भाव और प्रगाढ़ हो गया।

कलश यात्रा में महिलाओं की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भक्ति गीत गाती हुई चल रही थीं। उनके चेहरे पर आस्था की चमक साफ झलक रही थी। युवाओं की टोली जयकारे लगाते हुए अनुशासन बनाए रखे हुए थी, जिससे यात्रा शांतिपूर्वक आगे बढ़ती रही।
आयोजन की व्यवस्था में जुटे स्वयंसेवकों ने बताया कि स्थापना दिवस को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। भक्तों के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई। समिति का उद्देश्य था कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस अवसर पर आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी भी उपस्थित रहे। उन्होंने मंदिर समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम शहर में सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं। विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ मिलकर जब उत्सव मनाते हैं तो भाईचारे का संदेश दूर तक जाता है।

दो दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दो दिन तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूजा-अर्चना के बाद रात्रि में भजन संध्या होगी, जिसमें मां काली की महिमा का गुणगान किया जाएगा। भक्ति संगीत के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराने का प्रयास रहेगा।
भंडारे में उमड़ेगी आस्था
समिति के अनुसार, विशाल भंडारे की भी तैयारी की गई है। अनुमान है कि हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि व्यवस्था सुचारु बनी रहे। आयोजकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा का अवसर भी है।

मंदिर से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में यहां नियमित रूप से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां होती रही हैं। इन कार्यक्रमों ने क्षेत्र में एकता और सहयोग की भावना को नई मजबूती दी है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि मंदिर अब केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सामुदायिक मेलजोल का केंद्र बन चुका है।
सोमवार को निकली यह कलश यात्रा श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गई। भक्ति, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता ने स्थापना दिवस को विशेष गरिमा प्रदान की। पूरे आयोजन ने यह साबित किया कि आस्था जब उत्सव बनती है, तो वह समाज को जोड़ने की ताकत भी बन जाती है।

















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