आसनसोल : आसनसोल के रिवरसाइड क्षेत्र में मंगलवार को दामोदर बिहारी नाथ सेतु बंधन कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें दामोदर नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक में कमेटी के पदाधिकारियों ने आगामी चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए पुल निर्माण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाने की रणनीति तैयार की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि पुल निर्माण की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पोस्टर और दीवार लेखन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पश्चिम बर्दवान और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि आम लोगों को इस मांग के महत्व से अवगत कराया जा सके। समिति का मानना है कि लंबे समय से लंबित इस मांग को अब जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
बैठक में कमेटी के महासचिव चंदन मिश्रा, शिशिर कुमार पान, पंकज दास, सुब्रत सिंह, राजीव गिरी, गौतम सरकार, कौशिक मुखर्जी और राजेश मंडल सहित कई सदस्य उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि दामोदर नदी पर स्थायी पुल का निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
समिति के महासचिव चंदन मिश्रा ने बताया कि दामोदर नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर समिति पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रही है, लेकिन अब तक न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस पहल की गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों और संबंधित संस्थाओं को कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
उन्होंने बताया कि यदि स्थायी पुल का निर्माण हो जाता है तो आसपास के अनेक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से बांकुड़ा जिले के तिलुड़ी और डेकिया क्षेत्र तथा पुरुलिया जिले के सातुड़ी सहित बर्नपुर रिवरसाइड क्षेत्र के लगभग चालीस इलाकों के लोगों को सुगम यातायात की सुविधा प्राप्त होगी।

समिति के अनुसार वर्तमान में बड़ी संख्या में लोग अस्थायी मार्गों और संकरे पुलों के माध्यम से दामोदर नदी पार करते हैं। बताया गया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए नदी पार करनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, श्रमिकों और व्यापारियों को आवागमन में अधिक समय और जोखिम उठाना पड़ता है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि वर्तमान में नदी पर बने अस्थायी पुलों के माध्यम से हजारों लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। इन पुलों का निर्माण स्थानीय पंचायत स्तर पर कराया गया है, लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं हैं और बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।
बैठक में पुल निर्माण से जुड़ी पूर्व घोषणाओं का भी उल्लेख किया गया। समिति के अनुसार वर्ष 2008 में बर्नपुर स्थित इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन केंद्रीय इस्पात मंत्री ने दामोदर नदी पर लगभग 720 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए पचास करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी। हालांकि आवश्यक पहल न होने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और प्रस्तावित राशि वापस चली गई।
इसके बाद वर्ष 2022-23 के दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा पुल निर्माण की संभावना को लेकर सर्वेक्षण कराया गया था। सर्वेक्षण पूरा होने के बावजूद परियोजना को स्वीकृति नहीं मिल सकी, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा उत्पन्न हुई।
समिति के सदस्यों ने कहा कि पुल निर्माण का मुद्दा अब चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों के सामने रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी राजनीतिक दल इस मांग को अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगा, समिति उसके समर्थन पर विचार करेगी।
समिति का कहना है कि दामोदर नदी पर स्थायी पुल का निर्माण केवल यातायात सुविधा ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि पुल बनने से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क शहरी क्षेत्रों से बेहतर होगा।
बैठक के अंत में समिति के सदस्यों ने निर्णय लिया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन को और अधिक संगठित किया जाएगा तथा विभिन्न स्तरों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया जाएगा, ताकि लंबे समय से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।















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