कोलकाता : पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा प्रबंधों की व्यापक रूपरेखा तैयार कर ली है। गुरुवार को प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयोग आगामी 1 मार्च से राज्य में केंद्रीय सशस्त्र बलों की चरणबद्ध तैनाती आरंभ करेगा। प्रारंभिक चरण में 23 जिलों के अंतर्गत आने वाले 35 पुलिस जिलों और कमिश्नरेट क्षेत्रों में कुल 240 कंपनियां भेजी जाएंगी, ताकि चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सके।
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदान से पूर्व ही संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है। इसी रणनीति के तहत अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद बलों की आवाजाही शुरू की जाएगी। सूत्रों के अनुसार 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के पश्चात 1 मार्च से विभिन्न जिलों में कंपनियों की तैनाती प्रारंभ हो जाएगी।
तैनाती की योजना के मुताबिक उत्तर 24 परगना जिले को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। यहां तीन पुलिस जिलों और दो कमिश्नरेट क्षेत्रों को मिलाकर कुल 30 कंपनियां भेजी जा रही हैं। कोलकाता पुलिस क्षेत्र में 12 कंपनियां तैनात होंगी। मुर्शिदाबाद जिले में 16 कंपनियां, जबकि हावड़ा और दक्षिण 24 परगना में 15-15 कंपनियां सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी।

इसके अतिरिक्त पूर्व मेदिनीपुर और हुगली जिलों में 14-14 कंपनियां भेजी जाएंगी। मालदा और नदिया को 12-12 कंपनियां मिलेंगी, जबकि उत्तर दिनाजपुर में 11 और दक्षिण दिनाजपुर में 10 कंपनियां तैनात की जाएंगी। दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र तथा सिलीगुड़ी कमिश्नरेट को मिलाकर 9 कंपनियां और कूचबिहार में भी 9 कंपनियां तैनात होंगी। पूर्व वर्धमान में 8 कंपनियां भेजी जाएंगी। पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर और जलपाईगुड़ी में 7-7 कंपनियां तैनात की जाएंगी। पुरुलिया, झाड़ग्राम और अलीपुरद्वार को 5-5 कंपनियां तथा कलिम्पोंग को 3 कंपनियां आवंटित की गई हैं।
गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कंपनी में न्यूनतम 72 जवान तैनात रहेंगे। प्रारंभिक चरण में जिन 240 कंपनियों की तैनाती हो रही है, उनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 110 कंपनियां, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 55 कंपनियां, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की 21 कंपनियां, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 27 कंपनियां तथा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 27 कंपनियां शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10 मार्च तक अतिरिक्त 240 कंपनियां और राज्य में पहुंचाई जाएंगी, जिससे कुल संख्या 480 तक हो जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में लगभग 1100 कंपनियां तैनात की गई थीं। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार भी चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा बलों की संख्या में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय बलों की मौजूदगी से मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता और मतदाताओं का विश्वास सुनिश्चित होगा। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च, क्षेत्र भ्रमण और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त गश्त की योजना बनाई गई है। साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी।
राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। ऐसे में आयोग किसी प्रकार की अव्यवस्था या भय के माहौल को रोकने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बलों की तैनाती का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि मतदाताओं को निर्भय वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
गुरुवार को सामने आई इस विस्तृत योजना से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता। अब 1 मार्च से शुरू होने वाली तैनाती के बाद राज्य में चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय होने की संभावना है।

















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