आसनसोल : शुक्रवार को राहा लेन स्थित श्री श्याम मंदिर राहा लेन में तीन दिवसीय फाल्गुन महोत्सव उत्साह और भक्ति के वातावरण में जारी रहा। महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को हुआ था, जिसकी भव्यता शुक्रवार को और अधिक देखने को मिली। श्री श्याम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने पूरे शिल्पांचल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

महोत्सव के प्रथम चरण में निकली विशाल शोभायात्रा उषाग्राम स्थित जानकी मंदिर से प्रारंभ होकर जीटी रोड, हटन रोड, रामधनी मोड़ और एनएस रोड से गुजरते हुए मंदिर प्रांगण पहुंची। श्रद्धालु हाथों में रंग-बिरंगे निशान लिए “जय श्री श्याम” के उद्घोष के साथ आगे बढ़ते रहे। 51 विशाल निशानों के साथ हजारों छोटे निशानों की सहभागिता ने यात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। मार्ग के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।

फाल्गुन महोत्सव प्रत्येक वर्ष परंपरागत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक आस्था का प्रतीक है।
मंदिर परिसर में बाबा श्री श्याम का आकर्षक दरबार सजाया गया। सुसज्जित झांकी और रंगीन सजावट ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महिलाएं, पुरुष और बच्चे पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर निशान लहराते नजर आए। भजनों की मधुर ध्वनि और जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। आसनसोल नगर निगम के उपमेयर अभिजीत घटक, एमएमआईसी गुरुदास चटर्जी सहित श्री श्याम सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारी आयोजन में उपस्थित रहे। सभी ने भक्तों के साथ मिलकर आरती में भाग लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
महोत्सव के अगले चरण में एकादशी के पावन अवसर पर संध्या 6 बजे से प्रातः 4 बजे तक भव्य कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 28 फरवरी को चंग धमाल कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें भक्तजन पारंपरिक लोकधुनों पर झूमते नजर आएंगे।
फाल्गुन महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया है, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश भी दिया है। राहा लेन स्थित मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ यह दर्शाती है कि श्याम भक्ति का उत्साह दिनोंदिन बढ़ रहा है। शुक्रवार का दिन भक्ति, उल्लास और सामूहिक सहभागिता के नाम रहा, जिसने शिल्पांचल के धार्मिक परिवेश को नई ऊर्जा प्रदान की।















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