आसनसोल : रविवार को शहर के जिला अस्पताल में मानवता की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली, जब एक जरूरतमंद मरीज के लिए रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाने पर सामाजिक कार्यकर्ता संगीता नोनिया स्वयं आगे आईं और रक्तदान कर उसकी जान बचाने का प्रयास किया। इस घटना ने न केवल अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया, बल्कि क्षेत्र में समाजसेवा की नई प्रेरणा भी जगा दी।

जानकारी के अनुसार, आसनसोल निवासी भोलू नामक युवक अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि मरीज को तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण पहले से ही उपचार को लेकर चिंतित था, ऊपर से रक्त की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया। परिजन अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में रक्तदाताओं की तलाश में भटकते रहे, लेकिन समय पर कोई समाधान नहीं मिल सका।
इसी दौरान यह सूचना क्षेत्र की सक्रिय समाजसेवी एवं नियमित रक्तदाता संगीता नोनिया तक पहुंची। वह बिना देर किए अस्पताल पहुंचीं और मरीज के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि रक्त की कमी के कारण उपचार बाधित नहीं होने दिया जाएगा। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं रक्तदान किया।
संगीता नोनिया अब तक 26 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुकी हैं। उनका कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, क्योंकि इससे किसी को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें किसी जरूरतमंद के बारे में जानकारी मिलती है, वह यथासंभव सहायता के लिए तत्पर रहती हैं। रविवार का रक्तदान उनके जीवन का 26वां अवसर था, जिसे वह ईश्वर का आशीर्वाद मानती हैं।
संगीता नोनिया ‘अखिल भारतीय युवा शक्ति’ नामक स्वयंसेवी संगठन से जुड़ी हुई हैं और क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं। संगठन की संस्थापक संगीता देवी और उनके सहयोगी लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा से जुड़े कार्य कर रहे हैं। जरूरतमंद छात्रों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना, निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करना, दवाइयों का वितरण करना और नियमित रक्तदान शिविर लगाना उनकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संगीता नोनिया, सीमा भगत, सुलेखा, विकेश महतो, अंजना सिंह, आकाश बर्मन, जीतू प्रसाद, प्रकाश राम और जय प्रसाद जैसे कार्यकर्ताओं की बदौलत क्षेत्र में सेवा की एक मजबूत परंपरा विकसित हुई है। ये सभी लोग बिना किसी प्रचार-प्रसार के समाज के कमजोर वर्गों की सहायता में जुटे रहते हैं। कई बार रात में भी आपातकालीन स्थितियों में ये लोग अस्पताल पहुंचकर रक्तदान या अन्य सहयोग प्रदान करते हैं।

रविवार की घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। अस्पताल के चिकित्सकों ने भी संगीता के इस कदम की सराहना की और कहा कि यदि समाज में अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
रक्तदान के बाद संगीता नोनिया ने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें किसी की सहायता करने का अवसर मिला। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से आह्वान किया कि वे भी आगे आकर रक्तदान करें और सामाजिक संगठनों से जुड़ें। उनका कहना था कि महिलाएं यदि संकल्प लें तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की बड़ी शक्ति बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।”
इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कई युवाओं ने भी भविष्य में रक्तदान करने की इच्छा जताई। सामाजिक संगठनों का मानना है कि नियमित रक्तदान से न केवल जरूरतमंद मरीजों की सहायता होती है, बल्कि समाज में सहयोग और करुणा की भावना भी मजबूत होती है।
आसनसोल में रविवार का यह दिन सेवा और समर्पण की मिसाल बन गया। एक ओर जहां अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष चल रहा था, वहीं दूसरी ओर एक महिला की पहल ने उम्मीद की नई किरण जगा दी। समाज में ऐसे प्रयास यह संदेश देते हैं कि मानवता अभी जीवित है और जरूरत पड़ने पर लोग एक-दूसरे के लिए आगे आने को तैयार हैं।















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