आसनसोल : आसनसोल नगर निगम ने शहर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। नगर निगम ने निर्णय लिया है कि शहर में लगभग एक सदी से भी अधिक पुराने भाप से चलने वाले दो रोड रोलरों को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा और उन्हें आम जनता के लिए प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाएगी।

नगर निगम के महापौर बिधान उपाध्याय ने बताया कि इन ऐतिहासिक मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष पार्क विकसित किया जाएगा। इस पार्क में इन दोनों रोड रोलरों को संरक्षित अवस्था में रखा जाएगा, ताकि नागरिक विशेषकर नई पीढ़ी शहर के प्रारंभिक विकास के इतिहास को समझ सके।
जानकारी के अनुसार हाल ही में नगर निगम के बजट सत्र में शहर को अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए कई नए पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए लगभग दो करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसी योजना के अंतर्गत ऐतिहासिक महत्व रखने वाली इन मशीनों को संरक्षित करने की पहल भी की जा रही है।
दरअसल, आसनसोल शहर में भगत सिंह मोड़ के समीप वन क्षेत्र की सफाई के दौरान नगर निगम कर्मचारियों की नजर दो पुराने भाप चालित रोड रोलरों पर पड़ी। लंबे समय से उपेक्षित पड़े इन भारी मशीनों के चारों ओर झाड़ियां और खरपतवार उग आए थे। जब कर्मचारियों ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी तो नगर निगम के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर इन मशीनों का निरीक्षण किया और इनके ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए जांच शुरू की।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक जानकारी से पता चला है कि ये दोनों मशीनें लगभग वर्ष 1896 के आसपास इंग्लैंड की प्रसिद्ध कंपनी मार्शल, संस & Co. से आयात की गई थीं। उस समय इनका उपयोग शहर की सड़कों के निर्माण और समतलीकरण के लिए किया जाता था।
इतिहासकारों के अनुसार आसनसोल मूल रूप से एक महत्वपूर्ण रेलवे नगर के रूप में विकसित हुआ था। रेलवे और शहर के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 1850 में एक संघ समिति का गठन किया गया था। इसी समिति ने वर्ष 1885 में नगर पालिका की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद वर्ष 1896 में आसनसोल नगरपालिका ने औपचारिक रूप से अपना कार्य प्रारंभ किया। माना जा रहा है कि उसी समय नगर प्रशासन ने सड़क निर्माण के लिए इन भाप चालित रोड रोलरों की खरीद की थी।
ये मशीनें उस दौर की अत्याधुनिक तकनीक का उदाहरण मानी जाती थीं। इनमें लकड़ी अथवा कोयले की सहायता से भाप उत्पन्न की जाती थी और उसी भाप के दबाव से भारी लोहे के रोलर संचालित होते थे। इनका उपयोग सड़कों को समतल और मजबूत बनाने के लिए किया जाता था। हालांकि यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है कि इन मशीनों का उपयोग कितने वर्षों तक किया गया। समय के साथ आधुनिक तकनीक आने के बाद ये मशीनें अनुपयोगी हो गईं और धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो गईं।

महापौर बिधान उपाध्याय ने कहा कि शहर के बुनियादी ढांचे के विकास में इन मशीनों का ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसलिए इन्हें केवल कबाड़ के रूप में छोड़ देना उचित नहीं होगा। नगर निगम इन्हें एक धरोहर के रूप में संरक्षित करेगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह जान सकें कि अतीत में किस प्रकार की तकनीक का उपयोग कर शहर का विकास किया गया था।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में ये दोनों मशीनें लोक निर्माण विभाग की अनुपयोगी भूमि पर स्थित हैं। नगर निगम इस स्थान को साफ कर एक सुंदर पार्क विकसित करने की योजना बना रहा है। इस पार्क में इन दोनों रोड रोलरों को आकर्षक ढंग से स्थापित किया जाएगा और उनके इतिहास से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।
महापौर के अनुसार फिलहाल दोनों मशीनों की सफाई कर उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद आगामी विधानसभा चुनाव के उपरांत संबंधित विभागों की अनुमति प्राप्त कर क्षेत्र की झाड़ियों और जंगल को पूरी तरह साफ किया जाएगा। इसके पश्चात वहां पार्क निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
नगर निगम का मानना है कि यह पहल न केवल शहर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने में सहायक होगी, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि इन मशीनों को उचित रूप से संरक्षित कर प्रदर्शित किया गया तो यह स्थान शहर के लोगों के साथ-साथ बाहरी आगंतुकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
इस प्रकार आसनसोल नगर निगम ने शहर के इतिहास से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है, जिससे अतीत की तकनीकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा।















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