आसनसोल / कोलकाता : आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। शुक्रवार को प्राप्त राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की लगभग 150 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर व्यापक चर्चा करते हुए उन्हें लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही इन सीटों के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार इस बार उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में संगठनात्मक अनुभव और जीत की संभावना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वर्तमान में जिन सीटों पर भाजपा के विधायक हैं, उनमें से अधिकांश को पुनः उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इसके साथ ही पार्टी के उन पुराने कार्यकर्ताओं को भी प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई जा रही है, जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन, पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य तथा राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा संगठनात्मक स्तर के कई महत्वपूर्ण नेता भी इस बैठक में शामिल हुए। इनमें बिप्लब देब, सुनील बंसल, सतीश धोंड और अमित मालवीय जैसे केंद्रीय पदाधिकारी भी मौजूद थे।
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों की चुनावी स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया गया। पार्टी रणनीतिकारों ने पिछले चुनावों के परिणाम, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और संगठन की ताकत को ध्यान में रखते हुए सीटों का वर्गीकरण करने का निर्णय लिया। इसके तहत विधानसभा सीटों को तीन श्रेणियों—A, B और C—में विभाजित किया गया है।
A श्रेणी में उन सीटों को शामिल किया गया है जहां भाजपा की जीत की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। इन सीटों पर पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को उतारने की योजना बना रही है जो लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हों, जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो और जिनकी पहचान विश्वसनीय नेतृत्व के रूप में स्थापित हो चुकी हो।
B श्रेणी की सीटों पर भी पार्टी ने मजबूत उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत बनाने के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं C श्रेणी में उन सीटों को रखा गया है जहां पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व का कहना है कि इन सीटों पर भी चुनावी मुकाबला पूरी ताकत से लड़ा जाएगा और संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि जिन उम्मीदवारों ने पहले चुनाव जीतकर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन ऐसे उम्मीदवार वही होंगे जो लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हों और क्षेत्र में सक्रिय रहे हों।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पाल को फिर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इसी प्रकार खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप घोष के नाम की भी चर्चा सामने आ रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इन नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
वहीं भवानीपुर विधानसभा सीट को लेकर भी पार्टी के भीतर रणनीतिक चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संभावित मुकाबले को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से सुझाव मांगा है कि यहां से किसे उम्मीदवार बनाया जाए, ताकि चुनावी मुकाबला प्रभावी ढंग से लड़ा जा सके।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने की योजना बना रही है। उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जैसे ही विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा की जाएगी, पार्टी चरणबद्ध तरीके से उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है।

















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