आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले के बहुचर्चित एक करोड़ रुपये लूटकांड में फरार चल रहे मुख्य आरोपी पृथ्वीराज असवाल ने अंततः न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। लगभग डेढ़ वर्ष से अधिक समय तक फरार रहने के बाद उसने दुर्गापुर उपमंडल न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी सीआईडी ने उसे हिरासत में ले लिया। शुक्रवार को अदालत में पेशी के दौरान न्यायाधीश ने आरोपी को पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह सनसनीखेज लूटकांड 5 सितंबर 2024 को दुर्गापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 पर पियाला काली मंदिर के समीप घटित हुआ था। आरोप है कि उस दिन दिल्ली के लाजपत नगर निवासी व्यापारी मुकेश चावला अपनी कार से रूपनारायणपुर से कोलकाता की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनकी कार को रोककर उनसे लगभग एक करोड़ रुपये की नकदी लूट ली गई।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। घटना की सूचना मिलने के बाद व्यापारी ने दुर्गापुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि लूट की घटना में पुलिस के एक वाहन का उपयोग किया गया था, जिससे मामले ने और भी गंभीर रूप ले लिया।
जांच के क्रम में दुर्गापुर थाना के सहायक उपनिरीक्षक असीम चक्रवर्ती को इस मामले में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा सीआईडी के एक जवान चंदन चौधरी और पुलिस के डीआईबी विभाग के पूर्व अधिकारी मृत्युंजय सरकार को भी गिरफ्तार किया गया। इन गिरफ्तारियों के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
पुलिस ने इस मामले में कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। इनमें दुर्गापुर के सूरज कुमार राम और सुभाष शर्मा, सालानपुर थाना क्षेत्र के जोरबाड़ी निवासी राजू दत्ता, रूपनारायणपुर की महावीर कॉलोनी के गौतम चटर्जी तथा अचरा निवासी ऑगस्टीन मेस्सी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार सिंह और गोरखपुर निवासी अजय यादव को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया। पूर्वी मेदिनीपुर के मधुसूदन बाग और रांची के अंकित सिंह को भी जांच के दौरान हिरासत में लिया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी पृथ्वीराज असवाल के पिता रामनारायण असवाल सहित कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की थी। हालांकि घटना के बाद से ही पृथ्वीराज असवाल फरार चल रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार आशंका जताई जा रही थी कि वह देश छोड़कर नेपाल चला गया है, जिसके कारण उसकी गिरफ्तारी लंबे समय तक संभव नहीं हो सकी।
इस दौरान पुलिस ने कई बार उसके रूपनारायणपुर स्थित घर पर तलाशी अभियान चलाया। इसी क्रम में उसकी पत्नी को अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि बाद में उसे न्यायालय से जमानत मिल गई थी।
लगभग तेईस महीने तक फरार रहने के बाद अंततः सीआईडी के बढ़ते दबाव और कानूनी प्रक्रिया के चलते पृथ्वीराज असवाल ने मंगलवार को दुर्गापुर उपमंडल न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले उसने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका भी दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जांच के दौरान पृथ्वीराज असवाल की कई व्यावसायिक संपत्तियों को जब्त किया गया है। रूपनारायणपुर क्षेत्र में उसकी कई संपत्तियों को प्रशासन द्वारा अपने नियंत्रण में लिया गया है। इसके अलावा पिथाक्यारी स्थित उसके बड़े आवासीय भवन को भी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
फिलहाल सीआईडी आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान लूटकांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। शुक्रवार को अदालत द्वारा पांच दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति मिलने के बाद जांच एजेंसी अब इस बहुचर्चित मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।

















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