कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन में व्यापक स्तर पर फेरबदल करते हुए सख्त संदेश दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त को हटाए जाने के महज 24 घंटे के भीतर आयोग ने 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ-साथ कोलकाता पुलिस के डीसी (सेंट्रल) पद पर भी बदलाव कर दिया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कोलकाता पुलिस के डीसी (सेंट्रल) पद से इंदिरा मुखर्जी को हटाकर इलवाड़ श्रीकांत जगन्नाथराव को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव को चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसी क्रम में राज्य के विभिन्न जिलों में भी पुलिस नेतृत्व में बदलाव किया गया है। वीरभूम जिले की कमान अब 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी सूर्य प्रताप यादव को सौंपी गई है, जबकि कूचबिहार में जसप्रीत सिंह को नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। डायमंड हार्बर पुलिस जिले में बिपुल सरकार के स्थान पर इशानी पाल को जिम्मेदारी दी गई है।
मुर्शिदाबाद जिले में धृतिमान सरकार की जगह 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी सचिन को नया एसपी बनाया गया है। वहीं, बसिरहाट में अलकनंदा भोवाल को पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। मालदा जिले में अनुपम सिंह को कमान सौंपी गई है, जबकि पूर्व मेदिनीपुर में अंशुमान साहा को नया एसपी बनाया गया है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पूर्व मेदिनीपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक पारिजात विश्वास को हाल ही में नियुक्त किया गया था, लेकिन अब उन्हें भी हटा दिया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई या संभावित विवाद को लेकर बेहद सतर्क है।
इसके अलावा, पश्चिम मेदिनीपुर में पापिया सुल्ताना, जंगीपुर में सुरिंदर सिंह तथा बारासात में पुष्पा को नए पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। इन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह कदम राज्य में शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आयोग का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे में समय-समय पर बदलाव से निष्पक्षता बनी रहती है और किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव की संभावना कम होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के दौरान इस तरह के बड़े स्तर पर तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन इस बार जिस तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं, उससे आयोग की सक्रियता स्पष्ट रूप से झलक रही है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, इन तबादलों के बाद संबंधित जिलों में नए अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी हैं। आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियों के और तेज होने के साथ प्रशासन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। ऐसे में निर्वाचन आयोग के ये कदम राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की दिशा में निर्णायक माने जा रहे हैं।



















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