सालानपुर : पश्चिम बर्धमान जिले के सालानपुर क्षेत्र स्थित पिठाक्यारी ग्रामीण अस्पताल ने एक ऐसी चिकित्सकीय सफलता हासिल की है, जिसे वास्तव में ‘असंभव को संभव’ करने का उदाहरण कहा जा सकता है। बुधवार को सामने आई इस प्रेरणादायक घटना में अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनय रॉय और उनकी टीम ने एक अत्यंत गंभीर मरीज को नई जिंदगी देने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।

रूपनारायणपुर निवासी 80 वर्षीय बरुण बसु, जो कभी हिंदुस्तान केबल्स फैक्ट्री में एक सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता रहे थे, उम्र संबंधी कई जटिल बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि वे पूरी तरह बेहोश थे और शरीर का पोषण केवल ट्यूब फीडिंग के माध्यम से हो रहा था। लंबे समय तक एक ही अवस्था में पड़े रहने के कारण उनके शरीर में गंभीर बेडसोर्स हो गए थे, वहीं कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर और किडनी से जुड़ी समस्याओं ने स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया था।
प्रारंभ में उनका इलाज चित्तरंजन स्थित एक बड़े अस्पताल में चल रहा था, जहाँ प्रतिदिन 25 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा था। इसके बावजूद स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था और परिवार पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। ऐसे हालात में 16 फरवरी को उन्हें पिठाक्यारी ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉ. बिनय रॉय ने बताया कि मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और जीवित बचने की संभावना बेहद कम थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर एक विशेष उपचार योजना तैयार की। अस्पताल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के तहत मरीज को सभी आवश्यक दवाएं, यहां तक कि महंगे जीवनरक्षक एंटीबायोटिक्स भी निशुल्क उपलब्ध कराए।

चिकित्सा उपचार के साथ-साथ अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मानवीय संवेदनाओं के साथ मरीज की देखभाल की। धीरे-धीरे उनके शरीर के घाव भरने लगे, कूल्हे की हड्डी में सुधार हुआ और उनकी स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आने लगा। कुछ ही समय में फीडिंग ट्यूब हटा दी गई और उन्होंने सामान्य रूप से भोजन करना शुरू कर दिया।
आज बरुण बसु न केवल होश में हैं, बल्कि बातचीत कर रहे हैं, मुस्कुरा रहे हैं और अपने परिचित अंदाज में लोगों का हाल-चाल पूछ रहे हैं। उनकी इस स्थिति को देखकर परिवार के सदस्य भावुक हो उठे हैं। उनके दामाद अरूप रतन मंडल ने अस्पताल और विशेष रूप से डॉ. बिनय रॉय की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं है।
परिवार अब उस क्षण का इंतजार कर रहा है, जब बरुण बसु पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटेंगे। पिठाक्यारी अस्पताल की यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल है, बल्कि यह दर्शाती है कि समर्पण, संवेदनशीलता और टीमवर्क से असंभव भी संभव बनाया जा सकता है।














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