दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरती गुटबाजी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर पार्टी प्रत्याशी कवि दत्त लगातार जनसंपर्क और पदयात्राओं के माध्यम से जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठन के कुछ वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता ने अंतर्कलह की आशंकाओं को हवा दे दी है।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। शनिवार को खांदरा में आयोजित एक जनसभा के दौरान उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्य सचिव वी. शिवदासन दासू को दुर्गापुर पश्चिम सीट का विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त करने की घोषणा की। मंच से ही उन्हें तत्काल क्षेत्र में सक्रिय होने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद दासू सीधे दुर्गापुर पहुंचकर चुनावी गतिविधियों की कमान संभाल ली।
नए दायित्व के तहत शिवदासन दासू अब प्रतिदिन आसनसोल से दुर्गापुर आकर पूरे दिन चुनावी रणनीतियों और प्रचार अभियान की निगरानी करेंगे। उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि कहीं प्रचार में कोई कमी न रह जाए और संगठन पूरी तरह सक्रिय बना रहे। साथ ही उन्हें यह भी जिम्मा सौंपा गया है कि वे उन कार्यकर्ताओं की पहचान करें जो प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं या परोक्ष रूप से विरोधी दलों के संपर्क में हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कवि दत्त को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से पार्टी के एक वर्ग में असंतोष पनपा है। पुराने कार्यकर्ताओं का एक धड़ा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है, जिसके चलते वे सक्रिय प्रचार से दूर दिखाई दे रहे हैं। यहां तक कि कुछ पार्षदों पर पर्दे के पीछे से विपक्षी उम्मीदवार को समर्थन देने के आरोप भी चर्चा में हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे गंभीरता से ले रहा है।
कवि दत्त, जो एक सफल उद्योगपति के रूप में भी पहचाने जाते हैं, को स्थानीय व्यापारिक संगठनों और आम जनता का समर्थन मिल रहा है। उनके पक्ष में बढ़ता जनसमर्थन चुनावी दृष्टि से सकारात्मक संकेत दे रहा है, लेकिन संगठनात्मक असंतोष उनके लिए चुनौती बन सकता है। यही कारण है कि पार्टी ने समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है।

दुर्गापुर पहुंचने के बाद शिवदासन दासू ने कवि दत्त के साथ एक लंबी गोपनीय बैठक की, जिसमें चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद दासू ने स्पष्ट किया कि अब से हर गतिविधि पर उनकी सीधी नजर रहेगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं कवि दत्त ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं पार्टी नेतृत्व से एक अनुभवी मार्गदर्शक की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि दासू के मार्गदर्शन में सभी मतभेद दूर होंगे और पार्टी एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि तृणमूल कांग्रेस किसी भी प्रकार की अंदरूनी कमजोरी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। पार्टी का स्पष्ट लक्ष्य है कि संगठन को मजबूत कर हर स्तर पर एकजुटता बनाए रखी जाए, ताकि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।














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